प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को आयोजित एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि दोनों देशों ने बदलते वैश्विक परिदृश्य के मद्देनजर अपनी रणनीतिक भागीदारी को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है। इस शीर्ष वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच हुई इस बैठक का एक प्रमुख परिणाम रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा-पत्र को स्वीकार करना रहा। इसके साथ ही दोनों देशों ने ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप’ को भी अपनी मंजूरी दे दी है। यह कदम रेखांकित करता है कि वैश्विक और क्षेत्रीय रणनीतिक बदलावों के बीच दोनों देश आपसी तालमेल बढ़ाने की आवश्यकता को गहराई से महसूस कर रहे हैं। रक्षा के क्षेत्र में यह कदम दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच व्यापक सहमति बनी है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि एक भरोसेमंद, सस्ती और सतत ऊर्जा आपूर्ति के लिए औद्योगिक भागीदारी और रणनीतिक निवेश अत्यंत आवश्यक हैं। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा सुरक्षा पर एक साझा बयान भी जारी किया गया है। यह संयुक्त बयान इस बात की पुष्टि करता है कि दोनों देश भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर सहयोग बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापारिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से ऑस्ट्रेलिया को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति कर रहा है, जो कि बेहद महत्वपूर्ण है। दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया भी भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लगातार कोयला और प्राकृतिक गैस जैसे आवश्यक संसाधन प्रदान करता आ रहा है। यह परस्पर व्यापार दोनों देशों के आर्थिक संबंधों का एक मजबूत स्तंभ रहा है।
साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए दोनों पक्षों ने एक नई प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सहमति व्यक्त की है। इसके तहत अब ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा। विदेश सचिव ने जानकारी दी कि यह नई व्यवस्था वर्ष 2014 में दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित हुए असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को अमली जामा पहनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह नई सहमति भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने की दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। पर्यावरण और आर्थिकी के मोर्चे पर यह कदम दोनों देशों को नेट-जीरो उत्सर्जन (शून्य कार्बन उत्सर्जन) के साझा लक्ष्य की ओर ले जाएगा। साथ ही, इससे भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों को ही एक स्वच्छ ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण करने में बड़ी मदद मिलेगी।