ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में गुरुवार को भारतीय प्रवासियों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि भारत आत्मनिर्भरता और विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश में आज ‘चिप्स से लेकर शिप्स तक’ के निर्माण के लिए एक व्यापक विनिर्माण इकोसिस्टम का विकास किया जा रहा है। तकनीक के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने के इरादे से भारत अब 6G प्रौद्योगिकी के विकास पर भी पूरी ताकत से काम कर रहा है।
समारोह में देश की डिजिटल क्रांति का खाका खींचते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ समय पहले तक लोग भारत में 5G के आने और उसके रोलआउट की समयसीमा को लेकर संशय में थे। लेकिन साल 2022 के अंतिम महीनों में शुरू हुआ यह सफर आज देश के 99 फीसदी जिलों तक पहुंच चुका है। भारत आज दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शुमार है, जिन्होंने सबसे कम समय में 5G नेटवर्क का दायरा फैलाया है, और इसी वजह से देश आज विश्व का दूसरा सबसे बड़ा 5G मार्केट बन गया है।
तकनीकी आत्मनिर्भरता की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने साझा किया कि देश अब ‘मेड इन इंडिया’ 6G तकनीक को आकार देने में व्यस्त है। इसके साथ ही भारतीय युवाओं के पुरुषार्थ की बदौलत देश आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप केंद्र बन गया है। शुरुआती दौर के कुछ सौ स्टार्टअप की तुलना में आज देश में दो लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप काम कर रहे हैं और हर महीने 4,000 से ज्यादा नए उद्यम शुरू हो रहे हैं। यह बदलाव अब महानगरों से निकलकर देश के छोटे-छोटे जिलों और कस्बों तक पहुंच चुका है।
अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में आए बदलावों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि आज इन क्षेत्रों में सैकड़ों नए स्टार्टअप अपनी सेवाएं दे रहे हैं। देश का एक स्पेस स्टार्टअप बहुत जल्द अपने स्वयं के रॉकेट से अपना उपग्रह प्रक्षेपित करने के बेहद करीब है। इसके साथ ही देश गगनयान अभियान और अंतरिक्ष में भारत का अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने के लक्ष्य की तरफ मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इन बड़े संकल्पों के पीछे देश की जनता की ताकत है और वर्तमान सरकार ‘वी द पीपल’ तथा ‘नागरिक देवो भव:’ के मूल मंत्र को सुशासन का आधार मानकर कार्य कर रही है।
द्विपक्षीय संबंधों पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 के अपने पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे का स्मरण किया, जो कि 28 साल के लंबे समय के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का वहां का दौरा था। उन्होंने कहा कि उस वक्त उन्होंने प्रवासियों को भरोसा दिया था कि उन्हें दोबारा इतने लंबे समय तक प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। अपने उसी वादे को पूरा करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 12 सालों में यह उनकी तीसरी ऑस्ट्रेलिया यात्रा है और यह हैट्रिक भारत-ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते रिश्तों का प्रमाण है। उन्होंने इस सफलता का पूरा श्रेय प्रवासी भारतीयों की मेहनत और उनके योगदान को दिया।
इससे पूर्व, मेलबर्न आगमन पर भारतीय समुदाय के लोगों ने ‘वंदे मातरम’ और ‘मोदी-मोदी’ के गगनभेदी नारों के साथ प्रधानमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। इस अद्भुत अनुभव को साझा करते हुए पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि मेलबर्न की कड़ाके की ठंड के बीच भारतीय प्रवासियों के स्वागत की ऊष्मा और उत्साह दिल को छू लेने वाला था। मातृभूमि के प्रति उनका यह प्रेम वास्तव में गौरवपूर्ण है।
इस भव्य आयोजन के दौरान प्रधानमंत्री ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद लिया। समारोह में ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी समुदाय के पारंपरिक वाद्य यंत्र ‘डिजेरिडू’ और भारत के ‘तबले’ की जुगलबंदी ने समां बांध दिया। इसके अलावा कथक नृत्य और ‘मां तुझे सलाम’ की धुन पर 10 सदस्यीय सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा की प्रस्तुति भी की गई। इस पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के संगीत यंत्रों का यह अनूठा मेल भारत और ऑस्ट्रेलिया के गहरे तथा अटूट सांस्कृतिक संबंधों को जीवंत करता है।