महाराष्ट्र के नागपुर शहर में गुरुवार को भारत की अध्यक्षता के तहत तीसरी ब्रिक्स परिवहन कार्य समूह (टीडब्ल्यूजी) की बैठक का विधिवत शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस महत्वपूर्ण आयोजन में सदस्य देशों के शीर्ष अधिकारी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप टिकाऊ, सुदृढ़ और आधुनिक परिवहन प्रणालियों के विकास तथा इस दिशा में आपसी तालमेल को मजबूत करने के लिए एकत्रित हुए हैं।
इस दो दिवसीय बैठक के दौरान मुख्य रूप से ग्रीन मोबिलिटी (हरित गतिशीलता), टिकाऊ परिवहन ढांचे के निर्माण, सुदृढ़ लॉजिस्टिक्स व्यवस्था, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और वैश्विक परिवहन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने के लिए संस्थागत सहयोग को बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विमर्श किया जाएगा।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने सम्मेलन में आए सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के आदर्श वाक्य का जिक्र किया। उन्होंने वैश्विक सहयोग और समावेशी विकास के प्रति भारत के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि ब्रिक्स में भारत की अध्यक्षता का मूल विषय जन-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसका उद्देश्य एक कुशल, दीर्घकालिक और मजबूत परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है।
मंत्रालय के सचिव ने जानकारी दी कि भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के कार्यकाल के लिए परिवहन क्षेत्र में छह मुख्य प्राथमिकताएं निर्धारित की हैं। इनमें दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे का विकास, टिकाऊ विमानन ईंधन (एसएएफ), परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करना, शहरी आवागमन में सुधार, मजबूत लॉजिस्टिक्स और रेलवे अनुसंधान के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन प्रयासों का लक्ष्य सदस्य राष्ट्रों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है।
वी. उमाशंकर ने पूर्व में हुई ब्रिक्स परिवहन बैठकों की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रस्तावित कदम आगामी सहयोग के लिए एक ठोस आधार प्रदान करेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी सदस्य देश मिलकर एक ऐसी परिवहन प्रणाली का विकास करेंगे जो नवाचार पर आधारित, पर्यावरण के अनुकूल और आम जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
नागपुर की इस भौतिक बैठक की पृष्ठभूमि साझा करते हुए सचिव ने बताया कि इससे पहले पांच वर्चुअल (आभासी) बैठकों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई थी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि पूर्व बैठकों की तरह ही इस आयोजन में भी सहयोग और आम सहमति की भावना देखने को मिलेगी।
ब्रिक्स के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को रेखांकित करते हुए वी. उमाशंकर ने कहा कि वर्तमान में विस्तारित ब्रिक्स समूह दुनिया की तकरीबन 49.5 प्रतिशत आबादी, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के 26 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में परिवहन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला सुधरेगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह दो दिवसीय विचार-विमर्श आगामी परिवहन मंत्रियों की बैठक के लिए एक मजबूत रूपरेखा तैयार करेगा।
इस कार्य समूह की बैठक के समापन के पश्चात, 11 जुलाई 2026 को नागपुर में ही तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए जाने की संभावना है।