अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं। हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान का प्रमुख परमाणु ठिकाना ‘पिकएक्स माउंटेन’ अमेरिकी सेना की संभावित संपर्कों और हमलों की सूची में शामिल है तथा इस पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आवश्यक हुआ, तो इस ठिकाने को निशाना बनाया जा सकता है।
कंजर्वेटिव रेडियो होस्ट ह्यू हेविट के साथ बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस विशिष्ट ठिकाने की मुख्य प्रविष्टि (प्रवेश द्वार) पर एक बड़ा हमला किया जा सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम वर्तमान में मजबूत स्थिति में नहीं है और जब भी अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को वहां किसी संदिग्ध गतिविधि की भनक लगती है, उसे तुरंत निष्क्रिय कर दिया जाता है। इसी डर के कारण अब ईरानी प्रशासन इस विषय पर चर्चा करने से भी कतरा रहा है।
साक्षात्कार के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में दोनों देशों के बीच एक ऐसे समझौते पर सहमति बनने वाली थी, जिसमें अमेरिका की सभी मुख्य शर्तें शामिल थीं, लेकिन ईरान अंतिम समय में मुकर गया। ट्रंप के अनुसार, ईरानी प्रशासन के वादों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने आशंका जताई कि यदि ईरान परमाणु शक्ति संपन्न बनता है, तो वह बेहद कम समय में इन विनाशकारी हथियारों का उपयोग कर सकता है।
ईरान के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ रणनीतिक कार्रवाई के सवाल पर राष्ट्रपति ने कोई भी सीधा बयान देने से परहेज किया। हालांकि, उन्होंने यह जरूर स्पष्ट किया कि अमेरिका के पास ईरानी नेतृत्व से जुड़ी बेहद संवेदनशील और विस्तृत खुफिया जानकारियां उपलब्ध हैं, जिन्हें वह सार्वजनिक मंच पर साझा नहीं करना चाहते। इसके साथ ही ट्रंप ने यह दावा भी किया कि ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमताएं, जिनमें उसकी वायुसेना और नौसेना शामिल हैं, अब लगभग समाप्त हो चुकी हैं।
इससे पहले, व्हाइट हाउस में मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने इस संकल्प को दोहराया कि वाशिंगटन किसी भी परिस्थिति में तेहरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। इसके बावजूद, उन्होंने कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद होने से इनकार किया। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि सैन्य और रणनीतिक दबाव के बीच भी ईरान के साथ एक नए सिरे से समझौता किया जाना अभी भी मुमकिन है।