मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर की तीसरी बड़ी बमबारी

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर की तीसरी बड़ी बमबारी

मध्य पूर्व में युद्ध की आशंकाओं के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोमवार (स्थानीय समयानुसार) को ईरान के खिलाफ एक और बड़े सैन्य अभियान की पुष्टि की है। सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कमांडर इन चीफ के आदेश का पालन करते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोमवार शाम 4:45 बजे ईरान पर लगातार तीसरी रात भी हमले जारी रखे। अमेरिकी मीडिया नेटवर्क सीएनएन ने एक रक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि इस रणनीतिक कार्रवाई में विशेष रूप से ईरान के तटीय निगरानी तंत्र, लड़ाकू ड्रोन और मिसाइल प्रणालियों जैसी प्रमुख सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाकर उन्हें निष्क्रिय किया जा रहा है।

इस बड़े घटनाक्रम पर सोमवार को व्हाइट हाउस से बयान जारी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना आज रात और आने वाले कल में भी ईरान पर बेहद शक्तिशाली हमले करना जारी रखेगी। राष्ट्रपति ने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने न केवल मौजूदा सैन्य समझौते की शर्तों को तोड़ा है, बल्कि रणनीतिक समुद्री मार्ग में ड्रोन भेजकर उकसावे की कार्रवाई भी की है। ट्रंप ने ऐलान किया कि इन परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिका अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण कायम करेगा और इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थायी रूप से अपने हाथ में ले लेगा।

फॉक्स न्यूज के साथ एक साक्षात्कार के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अभियान की सफलता का दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना अधिकार स्थापित कर रहा है और अब ईरान के पास वहां मुकाबला करने के लिए कुछ नहीं बचा है। ट्रंप ने कहा कि पिछली रात अमेरिकी बमबारी में ईरानी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और यदि ईरान ने फिर से ड्रोन के जरिए कोई नई हरकत करने की कोशिश की, तो उसे पहले से भी ज्यादा सख्त सैन्य जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछली रात की भीषण कार्रवाई में ईरान की एंटी-एयरक्राफ्ट गन समेत उसके ज्यादातर सैन्य उपकरण नष्ट कर दिए गए हैं।

तनाव की पृष्ठभूमि साझा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक द्विपक्षीय समझौता पूरी तरह से फाइनल हो चुका था, लेकिन ऐन वक्त पर ईरान ने पूर्व निर्धारित शर्तों को बदलने की अनुचित मांग रख दी। ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच एक मुकम्मल डील हो चुकी थी, लेकिन ईरानी पक्ष अपनी बात से मुकर गया और उन्होंने इस समझौते को पूरी तरह भंग कर दिया।

ट्रंप ने बताया कि इस समझौते को लेकर ईरानी दल के साथ करीब 11 घंटे तक मैराथन बैठक चली थी। इस बैठक के शुरुआती दौर में ईरानी वार्ताकार सभी बिंदुओं पर पूरी तरह सहमत थे, लेकिन बाद में उन्होंने समझौते के प्रारूप में बदलाव की मांग करते हुए अपने वादे से पैर पीछे खींच लिए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि उन्होंने ईरान की इन नई मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने टिप्पणी की कि ईरानी वार्ताकार चर्चा के दौरान बार-बार शर्तें बदलने में माहिर हैं, लेकिन वे उनकी इस रणनीति को पेशेवर रूप से सही नहीं मानते।

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