मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जन-कल्याणकारी योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से 10 हजार 800 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई गई। कैबिनेट ने शहरों के कायाकल्प से लेकर किसानों के कल्याण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए कई दूरगामी फैसले लिए हैं।
कैबिनेट के प्रमुख निर्णयों के तहत राज्य सरकार ने शहरों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए नगरीय अधोसंरचना विकास मद में 8 हजार 445 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की है। यह मंजूरी वाणिज्य कर विभाग के तहत पालिका अधिनियम के अंतर्गत पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क के अधिभार से प्राप्त राशि को निधि में अंतरित करने की योजना के लिए दी गई है, जिसे आगामी 5 वर्षों तक संचालित किया जाएगा। इस राशि का उपयोग नगर निगम, नगरपालिका और नगर परिषदों द्वारा शहरी क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं को लागू करने तथा इसके लिए लिए गए ऋणों के पुनर्भुगतान के लिए किया जाएगा।
कृषि क्षेत्र और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए मंत्रि-परिषद ने रबी वर्ष 2023-24 और विपणन वर्ष 2024-25 के तहत एक बड़ा निर्णय लिया है। भारत सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत लक्ष्य से अधिक उपार्जित की गई मूंग के लिए 1,587 करोड़ रुपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति (गारंटी) देने की मंजूरी दी गई है। इसके तहत पंजाब नेशनल बैंक से ली गई साख सीमा में 19 जुलाई 2026 से 18 जनवरी 2027 तक 6 महीने के लिए 396 करोड़ रुपये और भारतीय स्टेट बैंक की साख सीमा में 3 जुलाई 2026 से 2 जुलाई 2027 तक 1 वर्ष के लिए शेष 1,191 करोड़ रुपये की निःशुल्क शासकीय गारंटी उपलब्ध कराई जाएगी।
सिंचाई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने राजगढ़ जिले में स्थित कुण्डलिया वृहद सिंचाई परियोजना को निरंतर रखने पर अपनी मुहर लगा दी है। जल संसाधन विभाग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 245 करोड़ 45 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य बांध का निर्माण कर सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के जरिए राजगढ़ और आगर-मालवा जिलों के 1,39,600 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की उन्नत क्षमता विकसित करना है।
महिला एवं बाल विकास क्षेत्र में एक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए मंत्रि-परिषद ने टेक-होम राशन के उत्पादन और उसके वितरण की पूरी व्यवस्था में बदलाव किया है। अब यह कार्य मध्य प्रदेश राज्य आजीविका फोरम से वापस लेकर तत्काल प्रभाव से महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंप दिया गया है। अंतरिम व्यवस्था के तौर पर स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पूरक पोषण आहार की आपूर्ति के लिए विभाग को अधिकृत किया गया है। इसके साथ ही, भारत सरकार के नए दिशा-निर्देश आने और नई व्यवस्था लागू होने तक अल्पकालिक निविदा के जरिए टेक-होम राशन की व्यवस्था संचालित की जाएगी, जिसके बाद विभाग एक स्थायी व्यवस्था स्थापित करेगा।
प्रशासनिक दक्षता को बनाए रखने के लिए कैबिनेट ने वाणिज्यिक कर विभाग के सुचारू संचालन हेतु भी वित्तीय मंजूरी दी है। विभाग के अंतर्गत संचालित तीन स्थापना योजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक (आगामी 5 वर्षों के लिए) जारी रखने के लिए कुल 521 करोड़ 4 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसमें से मुख्यालय संचालन के लिए 60 करोड़ 81 लाख रुपये, जिला कार्यालयों के लिए 434 करोड़ 81 लाख रुपये और परिक्षेत्रीय कार्यालयों के लिए 25 करोड़ 42 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इस बजट का उपयोग कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, कार्यालय खर्चों, व्यावसायिक सेवाओं के भुगतान और वाहनों व मशीनरी के रखरखाव में किया जाएगा।