नर्मदापुरम में पुलिस की त्वरित कार्रवाई: डूबती महिला को पानी से निकाला, सीपीआर देकर बचाई जान

नर्मदापुरम में पुलिस की त्वरित कार्रवाई: डूबती महिला को पानी से निकाला, सीपीआर देकर बचाई जान

मध्यप्रदेश पुलिस की आपातकालीन सेवा डायल-112 ने एक बार फिर अपनी तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण का प्रमाण दिया है। नर्मदापुरम के पोस्ट ऑफिस घाट पर 13 जुलाई को पानी में डूब रही एक महिला को पुलिस टीम ने सूझबूझ और साहस दिखाते हुए सुरक्षित बचा लिया। घटनास्थल पर समय रहते दिए गए सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रीससिटेशन) की मदद से महिला की सांसें वापस आ सकीं, जिसके बाद उसे तुरंत नजदीकी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।

घटनाक्रम के अनुसार, 13 जुलाई को डायल-112 नियंत्रण कक्ष को सूचना मिली थी कि पोस्ट ऑफिस घाट पर एक महिला नदी के पानी में डूब रही है। आपातकालीन टीम ने बिना कोई समय गंवाए मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। घटनास्थल पर महिला पानी में औंधे मुंह अचेत अवस्था में तैर रही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात प्रधान आरक्षक राकेश भिलाला ने तत्काल सक्रियता दिखाई और अपनी जान की परवाह न करते हुए महिला को सुरक्षित रूप से पानी से बाहर खींच निकाला।

महिला की नाजुक स्थिति को देखते हुए कोतवाली थाने में कार्यरत उप निरीक्षक दीपिका लोखंडे को तुरंत घटना स्थल पर बुलाया गया। उन्होंने अपनी पेशेवर कुशलता का परिचय देते हुए अचेत महिला को मौके पर ही सीपीआर देना शुरू किया। इस प्राथमिक चिकित्सा के प्रयास से महिला की थमी हुई सांसें दोबारा चलने लगीं। इसके तुरंत बाद पुलिस बल ने बिना देरी किए पीड़ित महिला को उपचार के लिए नर्मदापुरम के जिला अस्पताल में दाखिल कराया।

इस साहसिक और जीवनरक्षक अभियान की सराहना करते हुए नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा थोटा ने दोनों पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत किया है। एसपी ने उप निरीक्षक दीपिका लोखंडे और प्रधान आरक्षक राकेश भिलाला को उनकी कर्तव्यनिष्ठा, त्वरित निर्णय क्षमता और अदम्य साहस के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया।

इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मध्यप्रदेश पुलिस प्रशासन ने आम जनता से एक विशेष अपील जारी की है। पुलिस विभाग का कहना है कि किसी भी प्रकार के संकट या आपातकालीन परिस्थिति में नागरिकों को तुरंत डायल-112 पर संपर्क कर इसकी जानकारी देनी चाहिए। समय पर मिलने वाली सूचना और पुलिस की त्वरित जवाबी कार्रवाई कई बार किसी व्यक्ति के अमूल्य जीवन को बचाने में बेहद निर्णायक साबित होती है।

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