भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित होने जा रहा है, क्योंकि देश की पहली पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन परिचालन के लिए पूरी तरह तैयार है। शून्य-उत्सर्जन और स्वच्छ परिवहन की दिशा में इसे भारतीय रेल का एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक परियोजना की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल पर इस ट्रेन की झलकियां साझा कीं। उन्होंने अपनी पोस्ट में जानकारी दी कि भारत की इस पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन की शुरुआत हरियाणा राज्य से होने जा रही है। प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बाद से ही इस अत्याधुनिक परियोजना को लेकर आम जनता में भारी उत्सुकता देखी जा रही है।
यह पूरी योजना भारतीय रेलवे के ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ (विरासत के लिए हाइड्रोजन) कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित की जा रही है। इस दूरदर्शी पहल के तहत रेलवे का लक्ष्य आने वाले समय में ऐसी 35 और ट्रेनों को बेड़े में शामिल करना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के ऐतिहासिक (हेरिटेज) और ग्रामीण रेल मार्गों पर वर्तमान में चल रहे पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले डीजल इंजनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर पर्यावरण के अनुकूल विकल्प पेश करना है।
तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो इस नई ट्रेन को 10 डिब्बों वाले हाइड्रोजन-चालित डीईएमयू (DEMU) सेट के रूप में विकसित किया गया है। ट्रेन में यात्रियों के बैठने के लिए कुल 682 सीटें उपलब्ध कराई गई हैं, जबकि इसमें एक बार में कुल 2,600 यात्रियों को ले जाने की पर्याप्त क्षमता है। हालांकि परीक्षण (ट्रायल) के दौरान इस ट्रेन ने इससे कहीं अधिक रफ्तार हासिल की थी, लेकिन सुरक्षा और नियमित परिचालन को ध्यान में रखते हुए इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। शुरुआती चरण में एक पायलट प्रोजेक्ट होने के कारण इसे बेहद नियंत्रित और एहतियाती तौर पर शुरू किया जा रहा है।
संसदीय और तकनीकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ये हाइड्रोजन ट्रेनें असल में एक गतिशील पावरहाउस (बिजलीघर) की तरह कार्य करती हैं। ट्रेन के भीतर मौजूद हाइड्रोजन गैस का जब बाहरी वातावरण से ली गई ऑक्सीजन के साथ फ्यूल सेल में संयोजन कराया जाता है, तो इस रासायनिक प्रक्रिया के फलस्वरूप बिजली का उत्पादन होता है। यही बिजली ट्रेन में लगी इलेक्ट्रिक मोटरों को ऊर्जा देती है जिससे ट्रेन आगे बढ़ती है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी हानिकारक धुआं नहीं निकलता, बल्कि सह-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प और ऊष्मा (गर्मी) का उत्सर्जन होता है।
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि इन ट्रेनों को शुरू करने का प्राथमिक उद्देश्य भारतीय रेल नेटवर्क को पूरी तरह कार्बन मुक्त बनाना है। यह तकनीक विशेष रूप से उन दुर्गम रेल मार्गों के लिए बेहद वरदान साबित होगी जहां ओवरहेड बिजली की लाइनें बिछाना तकनीकी रूप से कठिन या अत्यधिक खर्चीला है। बिना किसी व्यापक और भारी बुनियादी ढांचे में बदलाव किए भी हाइड्रोजन ट्रेनें ठीक इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तरह ही शत-प्रतिशत पर्यावरणीय लाभ देती हैं। इसके साथ ही, इन्हें डीजल इंजनों की तरह ही बेहद कम समय (कुछ ही मिनटों) में दोबारा रीफ्यूल (ईंधन भरना) करके यात्रा के लिए रवाना किया जा सकता है।