ओडिशा के धार्मिक शहर पुरी में गुरुवार को भारी बरसात के बीच आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा और भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा संपन्न हुई। इस विशाल धार्मिक समागम में दो श्रद्धालुओं की मौत की खबर सामने आई है, जिस पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए सरकार ने साफ किया है कि इन घटनाओं का संबंध किसी भी तरह की भगदड़ या सुरक्षा व्यवस्था की खामी से नहीं है।
इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से आधिकारिक तौर पर बताया गया कि यात्रा के दौरान अचानक तबीयत खराब होने के कारण कुल 7 श्रद्धालुओं को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनमें से एक 60 साल के बुजुर्ग श्रद्धालु की मौत हो गई, जिसके कारणों की जांच की जा रही है, जबकि 35 वर्ष से अधिक आयु के एक अन्य श्रद्धालु की मृत्यु का कारण हृदय गति रुकना (हार्ट अटैक) रहा।
पुरी में गुरुवार सुबह से ही मौसम का मिजाज बदला हुआ था और निरंतर हो रही बारिश के बीच ही रथयात्रा से जुड़े तमाम पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। शाम को 5 बजे जब रथों को खींचने का सिलसिला शुरू हुआ, तो उसके एक घंटे बाद ही वर्षा का दौर रुक गया। इसके बाद होटलों और लॉज में मौजूद श्रद्धालु भी बड़ी तादाद में कार्यक्रम स्थल की ओर दौड़ पड़े, जिसके परिणामस्वरूप रथों के समीप अचानक जनसमूह बेहद सघन हो गया।
प्रशासनिक तैयारियों के बीच मौसम विभाग ने पहले ही क्षेत्र में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था, जिसके मद्देनजर पुलिस बल का यह आकलन था कि खराब मौसम के डर से लोग घरों से बाहर कम निकलेंगे। परंतु बारिश बंद होते ही स्थिति बदल गई और सड़कों पर अप्रत्याशित रूप से श्रद्धालुओं का जमावड़ा हो गया, जिससे मार्ग पर लोग संतुलन खोकर एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे।
गुरुवार देर शाम तक रथों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रही, जिसमें महाप्रभु जगन्नाथ का रथ 200 मीटर, भगवान बलभद्र का रथ 500 मीटर और माता सुभद्रा का रथ 700 मीटर की दूरी तय करने के बाद विश्राम की स्थिति में आ गया। सरकारी कार्यक्रम के अनुसार, शुक्रवार सुबह 9:30 बजे विधिवत पूजा-पाठ और महाप्रसाद का भोग लगाने के बाद इस यात्रा को पुनः प्रारंभ किया जाएगा।