केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने शुक्रवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का उद्घाटन किया। इस राष्ट्रीय समीक्षा बैठक में केंद्र और राज्यों के अधिकारियों ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अगले चरण के सफल संचालन की रूपरेखा तैयार की। इस दो दिवसीय सत्र का मुख्य उद्देश्य दावा प्रबंधन (क्लेम मैनेजमेंट) को पारदर्शी बनाना, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना, क्लीनिकल गवर्नेंस को उन्नत करना और स्वास्थ्य प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रयोग को बढ़ावा देना है।
मध्य प्रदेश भवन में आयोजित इस बैठक के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने एनएचए की वार्षिक रिपोर्ट जारी की। इसके साथ ही उन्होंने कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जिला कार्यान्वयन इकाई (डीआईयू), लाभार्थी सशक्तिकरण (बीई) और अस्पताल सूचीकरण मॉड्यूल (एचईएम) से संबंधित नए दिशानिर्देश भी देश के सामने रखे। इन नए नियमों का लक्ष्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में योजना के क्रियान्वयन में एकरूपता और प्रभावशीलता लाना है।
योजना की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में एलोपैथी और आयुष दोनों पद्धतियों को मिलाकर एक व्यापक स्वास्थ्य तंत्र विकसित किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि एबी पीएम-जेएवाई के तहत देश के 37,000 से अधिक संबद्ध अस्पतालों के माध्यम से अब तक 1.91 लाख करोड़ रुपए से अधिक की कैशलेस चिकित्सा सहायता नागरिकों को दी जा चुकी है, जिससे यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था के रूप में उभरी है।
एबीडीएम की प्रगति के संबंध में उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत देश में 94 करोड़ से ज्यादा आभा (ABHA) खातों का निर्माण किया जा चुका है और लगभग 100 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से लिंक किए गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एबीडीएम 2.0 का वास्तविक लक्ष्य महज डिजिटल रिकॉर्ड जुटाना नहीं है, बल्कि देशवासियों को सुव्यवस्थित और सरल डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है।
एनएचए के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बर्नवाल ने इस अवसर पर कहा कि एबी पीएम-जेएवाई और एबीडीएम की तकनीकी संरचना देश की स्वास्थ्य प्रणाली को जवाबदेह, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बना रही है। उन्होंने सभी राज्यों से नीति निर्धारण और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डेटा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की।
समीक्षा बैठक के दौरान सरकार की विभिन्न डिजिटल पहलों जैसे आरोग्य सेतु 2.0, आयुष्मान ऐप, आयुष्मान सारथी व्हाट्सएप चैटबॉट, राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय (एनएचसीएक्स), यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (यूएचआई), ड्रग रजिस्ट्री और भारत हेल्थ टर्मिनोलॉजी सर्विस के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। इन प्रणालियों को व्यापक स्तर पर लागू करने और इनके आपसी समन्वय को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया।
दावा निपटान को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए चिंतन शिविर में क्लीनिकल गवर्नेंस, लाभार्थियों के सत्यापन, और धोखाधड़ी रोकने के उपायों पर चर्चा की गई। तकनीकी सुधारों के अंतर्गत ऑटो-एडजुडिकेशन इंजन, रिस्क-बेस्ड मॉनिटरिंग और राष्ट्रीय एंटी-फ्रॉड यूनिट की कार्यप्रणाली को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया।
इस बैठक में आगामी प्राथमिकताओं को तय करते हुए सभी पात्र लाभार्थियों को योजना के दायरे में लाने, आयुष्मान कार्ड बनाने के काम में तेजी लाने, आशा व आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के नामांकन, आयुष्मान वय वंदना योजना को गति देने तथा डेटा-आधारित निर्णयों को लागू करने पर जोर दिया गया। राज्यों के साथ तालमेल बढ़ाकर डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई गई।
समीक्षा बैठक के प्रथम दिन के अंतिम सत्र में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली द्वारा क्लीनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (सीडीएसएस) और चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उपयोगिता पर एक प्रस्तुति दी गई। चिंतन शिविर के दूसरे और अंतिम दिन स्वास्थ्य वित्तपोषण, डिजिटल नवाचारों, डेटा विश्लेषण और विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाई जा रही सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों पर विस्तृत विमर्श किया जाएगा।