कटनी में बोले मुख्यमंत्री मोहन यादव- स्लीमनाबाद टनल बनेगी विंध्य के लिए वरदान, सिंचाई और पेयजल संकट का होगा स्थायी समाधान

कटनी में बोले मुख्यमंत्री मोहन यादव- स्लीमनाबाद टनल बनेगी विंध्य के लिए वरदान, सिंचाई और पेयजल संकट का होगा स्थायी समाधान

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी में स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण करने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न विंध्य क्षेत्र के कुछ हिस्सों में पानी की कमी एक बड़ी चुनौती रही है, जिसका समाधान अब इस परियोजना से होगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह टनल कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के लिए एक ‘अमृतधारा’ के समान है, जिससे भगवान श्रीराम के आशीर्वाद से चित्रकूट और विंध्य घाटी के इन पांच जिलों के कुल ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विस्तार होगा। इस परियोजना से स्थानीय निवासियों के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और कुछ स्थानों पर विद्युत उत्पादन भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस कार्य को राज्य सरकार के सिंचाई रकबा बढ़ाने के संकल्प को पूरा करने में एक निर्णायक कदम बताया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का धन्यवाद करते हुए बताया कि 1600 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली इस टनल परियोजना के लिए केंद्र ने लगभग 275 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता के कारण ही आज यह अत्यंत चुनौतीपूर्ण परियोजना पूर्ण होने की दिशा में बढ़ रही है। किसानों और क्षेत्रीय व्यापारियों के लिए इसे एक बड़ा वरदान बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 12 किलोमीटर लंबी यह टनल भविष्य में इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए एक केस स्टडी बनेगी। भीषण भूकंप की स्थिति में भी यह टनल आगामी 100 वर्षों तक पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। टनल की गहराई जमीन से नीचे कुछ स्थानों पर 120 फीट तक है।

मुख्यमंत्री ने इस वैज्ञानिक प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि हालांकि नर्मदा नदी खंभात की खाड़ी में गिरती है, लेकिन इस ऐतिहासिक टनल के माध्यम से अब मां नर्मदा का जल गंगा बेसिन में सोन नदी के आसपास के क्षेत्रों को भी हरा-भरा करेगा। एक समय ऐसा था जब इस टनल का निर्माण असंभव लग रहा था, परंतु बड़े संकल्प और पवित्र मन से किए गए प्रयासों के कारण सफलता मिली। लगातार कठिन चट्टानों की चुनौतियां सामने आने के बाद भी नर्मदा टनल को पूरा करने के लिए पूरी टीम प्रयासरत रही। उन्होंने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में पूर्व में सिंचाई क्षमता केवल 7.5 लाख हेक्टेयर थी, जो हमारी सरकारों के दौरान बढ़कर 44 लाख हेक्टेयर हुई और पिछले ढाई वर्षों में इसे 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा दिया गया है। किसान कल्याण वर्ष में यह परियोजना किसानों के लिए एक बड़ी सौगात है और आगामी तीन महीनों में रबी की फसल के लिए 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हेतु जल उपलब्ध करा दिया जाएगा।

कृषकों से अपनी भूमि न बेचने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सोन कछार के 152 क्यूबिक डिस्चार्ज से सतना में 1,04,970 हेक्टेयर, मैहर में 54,227 हेक्टेयर, कटनी में 21,823 हेक्टेयर, रीवा में 3,532 हेक्टेयर और पन्ना में 448 हेक्टेयर सहित कुल 1.85 लाख हेक्टेयर कमांड एरिया में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इसके समानांतर नहरों का निर्माण कार्य भी तेजी से जारी है। उन्होंने परियोजना की विशेषता बताते हुए कहा कि नीचे टनल से नर्मदा का जल बहेगा और उसके ठीक ऊपर से कटनी नदी प्रवाहित होगी। यह परियोजना बुंदेलखंड और बघेलखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होगी जिससे क्षेत्र से पलायन रुकेगा और आर्थिक समृद्धि आएगी। उन्होंने दावा किया कि भविष्य में यह क्षेत्र कृषि के मामले में पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ देगा। मुख्यमंत्री ने इस सफलता का श्रेय नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अभियंताओं, अधिकारियों और हजारों श्रमिकों के अथक परिश्रम को दिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्य कर रहे श्रमिकों से आत्मीय बातचीत कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।

परियोजना के पर्यावरणीय पहलुओं की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस टनल को राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे लाइन, भूमिगत क्रॉसिंग और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे से बेहद सुरक्षित तरीके से निकाला गया है, जिससे किसी भी प्रकार की ढांचागत या पर्यावरणीय क्षति नहीं हुई है। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे और स्थानांतरण की प्रक्रिया को पूरी संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ संपन्न किया गया है।

मुख्यमंत्री ने निर्माण के तकनीकी संघर्षों का विवरण देते हुए बताया कि शुरुआती दौर में 8 घंटे की तीन शिफ्टों में कार्य प्रारंभ किया गया था। वर्ष 2015 तक केवल 1406 मीटर टनल की बोरिंग हो सकी थी, जिसके कारण इसकी गति बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हुई। इसके बाद वर्ष 2016 से जर्मनी से आयातित आधुनिक मशीन के जरिए टनल के अपस्ट्रीम छोर से खुदाई का कार्य शुरू हुआ। इसके बाद चुनौतियां और बढ़ती गईं, लेकिन इंजीनियर, टेक्नीशियन और मजदूर सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए काम में जुटे रहे। एक लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार वर्ष 2026 में सफलता प्राप्त हुई है। इस टनल के पूर्ण होने से अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों को मिलाकर कुल ढाई लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबे का विस्तार होगा। इस अवसर पर राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, सांसद वी.डी. शर्मा, सांसद गणेश सिंह, विधायकगण प्रणय पांडे, संदीप जायसवाल, धीरेंद्र सिंह, संजय पाठक और जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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