मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से मानवीय संवेदनाओं को उजागर करने वाला एक मामला सामने आया है, जहां कोतवाली थाना क्षेत्र में रास्ता भूल चुके एक सात वर्षीय बच्चे को डायल-112 की टीम ने तत्परता दिखाते हुए सकुशल उसके परिवार तक पहुंचा दिया। पुलिस की इस त्वरित सहायता के चलते मासूम बिना किसी नुकसान के अपने घर वापस लौट सका। यह घटना 16 जुलाई की है, जब भोपाल स्थित राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 को सूचना मिली कि चित्रकूट नगर में रेलवे ट्रैक के पास एक छोटा बच्चा लावारिस हालत में घूम रहा है, जो अपने घर का पता भूल गया है और उसे मदद की दरकार है। जानकारी मिलते ही कोतवाली थाना क्षेत्र में गश्त कर रहे डायल-112 के वाहन को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।
मौके पर पहुंचे डायल-112 के स्टाफ आरक्षक दिनेश यादव और पायलट विजय कावड़े ने बिना वक्त गंवाए बालक को अपनी सुरक्षा में ले लिया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने बच्चे को अपने साथ वाहन में बिठाकर आस-पास के इलाकों में उसके माता-पिता की खोजबीन शुरू की और स्थानीय लोगों से पूछताछ की, लेकिन शुरुआती प्रयासों में परिजनों का कोई सुराग नहीं मिल सका। जमीन स्तर पर सफलता न मिलने के बाद पुलिस टीम ने आधुनिक माध्यमों का सहारा लिया और बच्चे की तस्वीरें व विवरण स्थानीय सोशल मीडिया ग्रुप्स पर साझा कर दिया।
सोशल मीडिया पर सूचना प्रसारित होने के कुछ ही समय बाद बालक के परिजनों से संपर्क स्थापित हो गया। इसके बाद पुलिस ने परिवार के सदस्यों को कोतवाली थाने बुलाया, जहां आवश्यक पहचान और दस्तावेजी सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चे को आधिकारिक तौर पर उनके सुपुर्द कर दिया गया। पूछताछ में यह बात सामने आई कि मासूम खेलते-खेलते अपने घर से काफी आगे निकल गया था और वापस लौटने का रास्ता भूल गया था। अपने कलेजे के टुकड़े को सही-सलामत वापस पाकर भावुक परिजनों ने डायल-112 की त्वरित सेवा और मुस्तैद पुलिस जवानों का दिल से धन्यवाद किया। संकट के समय में पुलिस की यह मुस्तैदी दर्शाती है कि डायल-112 आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षा देने के साथ-साथ आम जनता के प्रति अपनी मानवीय जिम्मेदारियों का भी पूरी निष्ठा से निर्वाह कर रही है।