प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को 7, लोक कल्याण मार्ग पर केंद्र सरकार के सचिवों की दूसरी उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अर्थशास्त्र, वित्त, प्रौद्योगिकी, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालयों की भावी प्राथमिकताओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य रूप से जन-केंद्रित शासन, तकनीकी स्वावलंबन और नवाचार को प्राथमिकता देने पर विचार-विमर्श हुआ।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल और मजबूत कार्य संस्कृति विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र के भीतर ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज रुकावटों को खत्म करके ही त्वरित और प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
जनहित को नीतियों का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत के नागरिक ही पूरी शासन प्रणाली के मूल केंद्र में हैं। इसलिए प्रशासनिक तंत्र द्वारा बनाए जाने वाले नियम और नीतियां देशवासियों की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर ही तय की जानी चाहिए।
बुनियादी ढांचे में भारी निवेश के साथ-साथ स्वदेशी तकनीकों के विकास को आवश्यक बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि तकनीकी आत्मनिर्भरता आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर भारत को सशक्त बनाएगी। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा को देश की स्थिरता और नागरिक कल्याण से जुड़ा विषय बताया और इसमें विविधता एवं क्षमता संवर्धन के माध्यम से आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की जरूरत पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक सुधारों को किसी दौर की मांग न मानकर शासन प्रक्रिया का एक अनिवार्य और सतत हिस्सा माना जाना चाहिए। इससे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली और संस्थागत क्षमता में सुधार आता है।
डिजिटल सुरक्षा के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने साइबर खतरों से बचाव के प्रबंध मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने युवाओं और स्टार्टअप्स को साइबर सुरक्षा इकोसिस्टम में शामिल कर इसे व्यापक स्तर पर ले जाने की बात कही। इसके साथ ही, तेजी से बढ़ते रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़ी भ्रामक सूचनाओं को दूर करने के लिए सक्रिय और प्रभावी जनसंपर्क को महत्वपूर्ण बताया।
भविष्य की जरूरतों के अनुसार युवाओं के कौशल विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को उद्योग जगत के सहयोग से तैयार किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के अनुसार, सरकार को नई परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने में सक्षम और दूरदर्शी होना चाहिए।
बैठक के अंत में विभिन्न विभागों के सचिवों ने अपने कार्यक्षेत्र के प्रमुख कार्यक्रमों, क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों और भविष्य के अवसरों पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर कैबिनेट सचिव सहित प्रधानमंत्री कार्यालय और विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।