संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों के भारी विरोध और नारेबाजी के बीच केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने एमएसएमई विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया। प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस के कथित बल प्रयोग के विषय को लेकर विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण उच्च सदन की कार्यवाही दिन भर बाधित रही और अंततः इसे बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
सदन की बैठक मंगलवार सुबह जैसे ही आरंभ हुई, विपक्षी सांसदों ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार से जवाब मांगने के लिए नारेबाजी शुरू कर दी। बढ़ते शोर-शराबे को देखते हुए दोनों सदनों की बैठक दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
अपराह्न 2 बजे जब राज्यसभा की कार्यवाही पुनः प्रारंभ हुई, तब भी विपक्षी दल के सदस्यों का विरोध-प्रदर्शन जारी रहा। इसी शोर-शराबे के मध्य एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने आसन से अनुमति मांगते हुए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन के पटल पर रखा। विधेयक पेश किए जाने के बाद भी जब व्यवस्था कायम नहीं हो सकी, तो सदन को अगले दिन यानी बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
विपक्ष के इस लगातार व्यवधान के कारण अन्य विधायी कार्य भी सीधे तौर पर प्रभावित हुए। इससे पूर्व गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा प्रस्तुत ‘राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर भी हंगामे की वजह से कोई चर्चा संभव नहीं हो सकी और विधायी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
दूसरी ओर, निचले सदन यानी लोकसभा में दोपहर बाद जब कार्यवाही शुरू हुई, तो ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा की शुरुआत हुई। हालांकि, मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह के दौरान राज्यसभा में विपक्षी विरोध के कारण विधायी कामकाज व्यापक रूप से प्रभावित हुआ है, फिर भी केंद्र सरकार अपने प्राथमिक विधेयकों को पटल पर रखने की प्रक्रिया में जुटी हुई है।
सदन में इस गतिरोध का मुख्य कारण विपक्षी दलों द्वारा छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब की मांग है। वहीं, सत्ता पक्ष का तर्क है कि सरकार छात्र हित में विधेयक लेकर आई है और इन पर व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।