जापान के क्यूशू क्षेत्र स्थित कुमामोटो प्रीफेक्चर में मंगलवार को 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसके बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (जेएमए) ने सुनामी की चेतावनी जारी कर दी। एजेंसी के अनुसार, भूकंप की अधिकतम तीव्रता ‘शिंदो 7’ दर्ज की गई, जो इस पैमाने का सर्वोच्च स्तर माना जाता है। भूकंप के झटके केवल जापान तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया के कई हिस्सों में भी महसूस किए गए।
भूकंप के तुरंत बाद जेएमए ने अरियाके और यत्सुशिरो समुद्र के तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी अलर्ट जारी करते हुए लोगों से समुद्र तटों और निचले तटीय इलाकों से दूर रहने की अपील की। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के कुछ ही समय बाद सुनामी की पहली लहर इन क्षेत्रों तक पहुंचने की आशंका थी, जबकि इसके बाद भी कई लहरें आने की संभावना जताई गई। कुमामोटो प्रीफेक्चर के यत्सुशिरो, उटो शहर, माशिकी और मिसातो कस्बों के साथ-साथ कुमामोटो शहर के मिनामी वार्ड में सबसे तेज झटके महसूस किए गए, जहां शिंदो पैमाने पर 6 की तीव्रता दर्ज की गई।
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र कुमामोटो शहर के दक्षिण में स्थित उकी शहर के पास था और इसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर मापी गई। भूकंप के कारण कुमामोटो प्रीफेक्चर में करीब 45,600 घरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। स्थानीय बिजली कंपनी क्यूशू इलेक्ट्रिक ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में बिजली बहाल करने का कार्य लगातार जारी है।
यह भूकंप वर्ष 2016 में कुमामोटो में आए विनाशकारी भूकंपों के लगभग एक दशक बाद आया है। अप्रैल 2016 में आए दो बड़े भूकंपों में 278 लोगों की जान गई थी और लगभग 2,800 लोग घायल हुए थे। उस आपदा में ऐतिहासिक कुमामोटो कैसल को भी भारी नुकसान पहुंचा था। इस ऐतिहासिक धरोहर की बहाली का कार्य अभी जारी है और इसके वर्ष 2052 तक पूरा होने की उम्मीद है।
भूकंप के असर पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया में भी महसूस किए गए। योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर बुसान में अधिकारियों को भूकंप महसूस होने की सूचना देने के लिए 157 फोन कॉल प्राप्त हुए, जबकि अन्य कॉल भी लगातार आती रहीं। भूकंप के झटकों के बाद कई लोगों ने एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों की ओर रुख किया।