ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मंगलवार रात भारतीय एथलीट गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। इस वैश्विक प्रतियोगिता के इतिहास में इस स्पर्धा में पदक तालिका तक पहुँचने वाले वह पहले भारतीय धावक बन गए हैं। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ गुलवीर ने एशियन गेम्स में प्राप्त ब्रॉन्ज और एशियन चैंपियनशिप में जीते दो गोल्ड मेडल के बाद अब राष्ट्रमंडल खेलों का पदक भी अपने नाम कर लिया है।
ग्लासगो में बारिश के बीच संपन्न हुई इस प्रतिस्पर्धा में भारत के इस उत्कृष्ट लॉन्ग-डिस्टेंस रनर ने 27:49.78 मिनट का समय दर्ज करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। पूरी रेस के दौरान धैर्य बनाए रखते हुए वह मुख्य समूह के साथ बने रहे और अंतिम लैप में अपनी गति को तेजी से बढ़ाते हुए तीसरे स्थान से आगे निकलकर दूसरा स्थान हासिल किया। ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने इस स्पर्धा में पहला स्थान पाया, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुल्लार्की ने ब्रॉन्ज मेडल प्राप्त किया। इस मुकाबले में केन्या और युगांडा जैसे एथलेटिक्स के पारंपरिक मजबूत देशों के धावक पोडियम तक पहुँचने में असफल रहे।
अपनी इस अभूतपूर्व सफलता पर बात करते हुए नेशनल रिकॉर्ड होल्डर गुलवीर सिंह ने इसका श्रेय निरंतर कठोर परिश्रम, कोच के दिशा-निर्देशों और खेल अनुशासन को दिया। उन्होंने कहा कि जितनी मेहनत उन्होंने की थी, उसे देखते हुए पदक जीतना निश्चित था। उनका ध्यान पूरी तरह अपनी रणनीति पर केंद्रित था। उन्होंने स्पष्ट किया कि कठिन प्रशिक्षण के दौरान वे पूरी तरह से अपने कोच की हिदायतों का पालन करते हैं। यदि कोच किसी विशेष वर्कआउट का निर्देश देते हैं, तो वे बिना किसी भटकाव के उसी योजना पर टिके रहते हैं।
यह जीत हालिया वर्षों में भारत के उभरते लॉन्ग-डिस्टेंस रनर गुलवीर सिंह की निरंतर बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की मेडल तालिका में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली उनकी यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत मेहनत का सुखद परिणाम है, बल्कि यह भारतीय लॉन्ग-डिस्टेंस एथलेटिक्स के इतिहास में भी एक नया और अहम पड़ाव साबित हुई है।