‘मछलीपटनम’ युद्धपोत का सफल जलावतरण, स्वदेशी तकनीक से मजबूत हुई नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता

‘मछलीपटनम’ युद्धपोत का सफल जलावतरण, स्वदेशी तकनीक से मजबूत हुई नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) में मंगलवार को भारतीय नौसेना के माहे क्लास प्रोजेक्ट के तहत सातवें उथले पानी के पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मछलीपटनम’ का जलावतरण संपन्न हुआ। सैन्य मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव वाइस एडमिरल अतुल आनंद तथा श्रीमती गुलरुख आनंद की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रीमती आनंद ने पोत का औपचारिक शुभारंभ किया। इस दौरान भारतीय नौसेना और शिपयार्ड प्रबंधन के शीर्ष अधिकारी भी उपस्थित रहे।

भारत के पूर्वी तट पर स्थित और अपनी ऐतिहासिक व्यापारिक पहचान के लिए प्रसिद्ध आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के शहर ‘मछलीपटनम’ के नाम पर इस पोत का नामकरण किया गया है। यह नामकरण देश की समृद्ध समुद्री परंपराओं को सम्मान देने के साथ-साथ नौसेना द्वारा भारत के समुद्री क्षेत्रों की रक्षा के संकल्प को भी प्रदर्शित करता है।

यह पोत बहुआयामी समुद्री चुनौतियों से निपटने में सक्षम है। इसे मुख्य रूप से पनडुब्बी रोधी अभियानों, समुद्र के नीचे व्यापक निगरानी, कम तीव्रता वाले नौसैनिक अभियानों और जल के भीतर बिछाई गई बारूदी सुरंगों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने जैसे संवेदनशील कार्यों के लिए विकसित किया गया है। यह क्षमता तटीय रक्षा को मजबूत करने में निर्णायक साबित होगी।

यह परियोजना केंद्र सरकार के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। लगभग 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों और सामग्री से निर्मित यह पोत भारत की घरेलू जहाज निर्माण उद्योग की तकनीकी आत्मनिर्भरता को प्रमाणित करता है। माहे श्रेणी के इन पोतों का निर्माण भारतीय नौसेना की परिचालन दक्षता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल होने के पश्चात यह पोत देश की समुद्री सीमाओं की अभेद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने और तटीय अभियानों को सफलता से अंजाम देने में ‘मछलीपटनम’ की भूमिका आने वाले समय में अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है।

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