भारतीय थलसेना और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के साझा प्रयासों से ‘एक्सट्रीम वेदर ग्रेड’ (XWG) नामक एक उन्नत डीजल विकसित किया गया है, जो -42 डिग्री सेल्सियस के अति-निम्न तापमान में भी पूरी तरह क्रियाशील रहेगा। थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने शुक्रवार को इस विशेष ईंधन के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर इसका आधिकारिक शुभारंभ किया। इस नवाचार के माध्यम से देश की उत्तरी सीमाओं पर तैनात सैन्य बेड़े की परिचालन क्षमता में बड़ा सुधार आएगा।
पूर्वोत्तर और उत्तरी सीमा के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान सामान्य डीजल जम जाने से वाहनों को चालू रखना एक बड़ी चुनौती थी। ईंधन में मौजूद वैक्स गाढ़ा होकर ऑयल फिल्टर को बंद कर देता था, जिससे टैंकों और बीएमपी वाहनों के सिस्टम को चालू रखने के लिए सैनिकों को रात भर बार-बार इंजन स्टार्ट करना पड़ता था। नए ईंधन के आगमन से अब रात भर गाड़ियाँ चालू रखने की मजबूरी समाप्त हो जाएगी, जिससे सैनिकों की शारीरिक और मानसिक थकान कम होगी।
कार्यक्रम के दौरान थलसेना प्रमुख ने अपने दो दशकों के आर्मर्ड कोर अनुभव को याद करते हुए बताया कि किस प्रकार सैन्य जीवन में हर निर्णय ईंधन की उपलब्धता और क्रूज़िंग रेंज पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि न्योमा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम करने वाले सैनिकों और चालकों के लिए यह बदलाव राहत देने वाला है। यह विशेष डीजल भारी टैंकों से लेकर सामान्य रसद ट्रकों तक, सभी श्रेणियों के सैन्य वाहनों के लिए बेहद प्रभावकारी सिद्ध होगा।
सेना और बीपीसीएल के बीच महज एक वर्ष के भीतर हुए इस सफल सहयोग को ‘गेम चेंजर’ करार देते हुए उन्होंने बताया कि इस डीजल का पोर पॉइंट -42 डिग्री सेल्सियस है, जिससे यह न्यूनतम तापमान में भी तरल बना रहता है। इसके साथ ही, लगभग 50 डिग्री सेल्सियस का फ्लैश पॉइंट इसे अत्यधिक गर्मी और परिवहन के दौरान पूरी तरह सुरक्षित बनाए रखता है।
जनरल सेठ ने स्पष्ट किया कि आधुनिक युद्ध कला में निर्बाध गतिशीलता ही सबसे प्राथमिक आवश्यकता होती है। यदि गतिशीलता बाधित होती है तो सैन्य अभियानों की प्रभावशीलता प्रभावित होती है। ऐसे में, यह एक्सट्रीम वेदर ग्रेड डीजल दुर्गम इलाकों में सेना को किसी भी मौसम में त्वरित और निरंतर आवाजाही की सामर्थ्य प्रदान करेगा।