मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर भोपाल में सोमवार को मंत्रिमंडल समूह ने बस ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में राज्य के परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह और जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, परिवहन आयुक्त तथा बस ट्रांसपोर्ट यूनियन के प्रदेश स्तर के पदाधिकारी मौजूद रहे। वार्ता के दौरान बस संचालकों की विभिन्न समस्याओं और उनके व्यावहारिक समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान राज्य में परिवहन सेवाओं को अधिक सुदृढ़ और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से एक विशेष कमेटी के गठन की घोषणा की गई। इस समिति में शासन की ओर से 3 प्रशासनिक अधिकारी, ट्रांसपोर्ट यूनियन के 4 पदाधिकारी और मुख्यमंत्री द्वारा अधिकृत 1 प्रतिनिधि शामिल रहेगा। यह कमेटी ट्रांसपोर्टरों की मांगों और समस्याओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें देगी, जिसके बाद सरकार उन पर अंतिम विचार-विमर्श करके आगे का निर्णय लेगी।
बस किराये में संशोधन के विषय पर परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार इस संबंध में पहले ही सिद्धांत रूप में निर्णय ले चुकी है। उन्होंने बताया कि विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी इस पर सहमति जताई थी और जल्द ही इस विषय पर औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।
वाहनों के पंजीयन को लेकर बैठक में तय हुआ कि अब ओडिशा और केरल के मॉडल की तर्ज पर रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू की जाएगी। मान्यता प्राप्त एवं विधिवत बॉडी मेकर्स से तैयार कराई गई गाड़ियों का ही पंजीयन होगा। इसके साथ ही, तय समय-सीमा (डेडलाइन) से पहले खरीदे गए चेसिस पर भी सहमति बन गई है। सरकार ने यह संकेत भी दिया कि आवश्यकता को देखते हुए बसों की परिचालन अवधि (लाइफ) से जुड़े नियमों में संशोधन किया जा सकता है।
अंतर्राज्यीय बस परमिट के लंबे समय से लंबित मामलों पर नियमों के तहत त्वरित कार्रवाई का निर्णय लिया गया। यह तय किया गया कि जिन बसों का टैक्स पहले से जमा है और केवल परमिट जारी होना शेष है, उन्हें शीघ्र ही नियमानुसार परमिट जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
विभाग की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए कर्मचारियों की कमी और कार्यालयीन व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि परिवहन विभाग में पदोन्नतियां दी जा चुकी हैं और रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा, आम जनता और वाहन स्वामियों को सुगम सेवाएं देने के लिए आउटसोर्सिंग के जरिए कंप्यूटर ऑपरेटरों एवं अन्य सहायक कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। मंत्रिमंडल समूह ने आश्वस्त किया कि राज्य में बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए सरकार ट्रांसपोर्टरों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखेगी।