भुवनेश्वर में 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक संपन्न: मानव-केंद्रित शिक्षा, एआई के सुरक्षित उपयोग और पांच प्रमुख प्राथमिकताओं पर बनी साझा सहमति

भुवनेश्वर में 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक संपन्न: मानव-केंद्रित शिक्षा, एआई के सुरक्षित उपयोग और पांच प्रमुख प्राथमिकताओं पर बनी साझा सहमति

भुवनेश्वर में आयोजित 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा को सर्वसम्मति से अपनाने के साथ संपन्न हो गई। इस सम्मेलन में भारत के केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने ब्रिक्स सहयोग के प्रति भारत के जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को रेखांकित किया। बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित सभी सदस्य राष्ट्रों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लेकर शिक्षा प्रणालियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने पर सहमति व्यक्त की।

वर्ष 2026 के लिए भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के मूल वाक्य ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता का निर्माण’ को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शिक्षा नीतियां और अंतरराष्ट्रीय सहयोग तभी सफल हो सकते हैं जब शिक्षार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और युवाओं को निर्णय निर्माण के केंद्र में रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नवाचार और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियां एक-दूसरे की पूरक हैं। ओडिशा की प्राचीन शिक्षा परंपरा तथा ‘अतिथि देवो भव:’ एवं ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जैसे भारतीय मूल्यों का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के अनुभव भले अलग हों, लेकिन उनकी प्रगति का मार्ग आपस में जुड़ा हुआ है।

इस बैठक का मुख्य हासिल शिक्षा सहयोग के लिए चिन्हित पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर साझा कार्ययोजना की स्वीकृति रहा। इसके तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) तथा बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने और डिजिटल माध्यमों के आयु-अनुकूल उपयोग पर जोर दिया गया। इसके अलावा, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण सहयोग गठबंधन (ब्रिक्स-टीसीए) के माध्यम से कौशल विकास को विस्तार देने और अंतरराष्ट्रीय कौशल अंतराल अध्ययन कराने की भारत की स्वैच्छिक पहल की सराहना की गई।

अनुसंधान और उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सुरक्षित, नैतिक और मानव-केंद्रित उपयोग को बढ़ावा देने पर सभी देशों ने सहमति जताई। शैक्षणिक गतिशीलता को सुगम बनाने के लिए योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (एमआरक्यू) पर विचार-विमर्श आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही ब्रिक्स रेक्टर्स फोरम के आयोजन, संकाय आदान-प्रदान, एसटीईएम छात्रवृत्ति और ब्रिक्स विश्वविद्यालय वैश्विक रैंकिंग प्रणाली की संभावनाओं को तलाशने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालय में शामिल करने के भारत के प्रस्ताव का भी स्वागत हुआ।

शिक्षा मंत्रालय ने इसी कड़ी में 5 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में तीसरी ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक (एसओएम) भी आयोजित की थी। भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान विभिन्न विषयगत बैठकों की मेजबानी जारी रखेगा, जिसका समापन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ होगा।

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