अमेरिका ने बढ़ाए एच-1बी और एल-1 वीजा विस्तार के शुल्क, भारतीय आईटी कंपनियों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ

अमेरिका ने बढ़ाए एच-1बी और एल-1 वीजा विस्तार के शुल्क, भारतीय आईटी कंपनियों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ

अमेरिकी प्रशासन ने सोमवार को वीजा नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए बड़े नियोक्ताओं के लिए एच-1बी और एल-1 वीजा के विस्तार पर क्रमशः 4,000 और 4,500 अमेरिकी डॉलर का नया शुल्क लागू करने की घोषणा की है। यह नियम 9 सितंबर से लागू होगा, जिसका सीधा असर भारत की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और परामर्श सेवा कंपनियों पर पड़ेगा, जो ऑनशोर-ऑफशोर मॉडल पर काम करती हैं।

अभी तक यह अतिरिक्त शुल्क केवल शुरुआती वीजा आवेदनों या कर्मचारी द्वारा कंपनी बदलने की स्थिति में ही वसूला जाता था। हालांकि, अमेरिकी गृह विभाग द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के तहत अब वीजा अवधि के विस्तार पर भी यह भुगतान अनिवार्य कर दिया गया है। यह व्यवस्था उन संस्थानों पर लागू होगी जिनमें 50 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं और जिनके कुल कार्यबल में 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी एच-1बी या एल-1 वीजा धारक हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से अमेरिका में कार्य कर रही वैश्विक परामर्श फर्मों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, आईटी सेवा प्रदाताओं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए कर्मचारी प्रायोजन की लागत में भारी बढ़ोतरी होगी। विशेष रूप से जो नियोक्ता अपने मौजूदा कर्मचारियों का वीजा बार-बार बढ़ाते हैं, उन्हें हर विस्तार आवेदन पर अतिरिक्त वित्तीय भार झेलना पड़ेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन आवेदनों में वीजा अवधि बढ़ाने का अनुरोध नहीं होगा, उन्हें इस शुल्क से छूट मिलेगी।

अमेरिकी गृह विभाग का अनुमान है कि वीजा विस्तार आवेदनों पर यह प्रशासनिक बदलाव लागू करने से प्रतिवर्ष लगभग 15.73 करोड़ डॉलर का राजस्व प्राप्त होगा। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस राजस्व का उपयोग अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग के तहत संचालित हवाई व समुद्री बायोमेट्रिक प्रवेश-निकास प्रणाली के संचालन एवं वित्तपोषण के लिए किया जाएगा। राष्ट्रीय सुरक्षा निर्देशों के तहत इस स्वचालित निगरानी तंत्र को प्राथमिकता दी जा रही है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) ने दिसंबर 2015 में एक पूर्ववर्ती शुल्क के स्थान पर इस व्यवस्था को मंजूरी दी थी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बायोमेट्रिक निगरानी कार्यक्रमों को निरंतर वित्तीय सहायता प्रदान करना था।

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