सोमवार को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर राष्ट्रीय ध्वज के नियमों के प्रति सजगता बरतने का निर्देश दिया। केंद्र ने कहा कि खेल, राष्ट्रीय पर्वों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कागज के झंडों का इस्तेमाल किया जा सकता है, किंतु कार्यक्रम खत्म होने के बाद उन्हें जमीन पर गिराना या फेंकना पूरी तरह प्रतिबंधित है। सरकारी बयान में कहा गया कि देखने में आता है कि आम जनता के साथ-साथ कई शासकीय विभागों व संस्थाओं में भी तिरंगा फहराने से संबंधित विधियों और कानूनी बारीकियों की पूरी जानकारी नहीं होती।
अपने पत्र में गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि तिरंगा भारत के नागरिकों की आकाँक्षाओं और राष्ट्रीय गौरव का प्रतिनिधित्व करता है, जिसके चलते इसे हमेशा सर्वोच्य सम्मान दिया जाना आवश्यक है। मंत्रालय ने राज्य सरकारों को निर्देशित किया कि वे इस विषय पर आम जनता को जागरूक करने के लिए व्यापक कदम उठाएं। इसके लिए समाचार पत्रों और टीवी चैनलों जैसे माध्यमों में विज्ञापन देकर झंडा संहिता के नियमों का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने की बात कही गई है।
अभियान के संदर्भ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी देशवासियों से अपील जारी की। उन्होंने नागरिकों को तिरंगा यात्राओं में भाग लेने, वंदे मातरम के सामूहिक गान और आधिकारिक पोर्टल पर तिरंगे के साथ अपनी फोटो साझा करने के लिए प्रेरित किया। गृह मंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान देश की सामूहिक ऊर्जा को दर्शाता है, जो हमें एक समृद्ध और ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में एकजुट करता है। उन्होंने जोड़ा कि इस वर्ष ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का अवसर इस राष्ट्रीय आयोजन को प्रत्येक देशभक्त के लिए और अधिक भावुक बना देता है।
जारी की गई झंडा संहिता के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण में केवल सूती, खादी, पॉलिएस्टर, रेशमी या ऊनी कपड़े का ही प्रयोग किया जा सकता है, चाहे वह हाथ से बुना गया हो या मशीन से बना हो। निर्देशों में स्पष्ट है कि कोई भी नागरिक, विद्यालय या निजी संस्था तिरंगे की गरिमा को बरकरार रखते हुए किसी भी दिन या अवसर पर इसे सम्मानपूर्वक फहरा सकती है। वर्ष 2022 के संशोधन का संदर्भ देते हुए बताया गया कि आम नागरिक अपने घरों या खुले परिसरों में दिन और रात दोनों वक्त तिरंगे को प्रदर्शित कर सकते हैं।
अंत में, निर्देशों के माध्यम से चेतावनी दी गई है कि किसी भी सूरत में क्षतिग्रस्त या गंदे झंडे को फहराया न जाए। राष्ट्रीय ध्वज के बराबर या उससे अधिक ऊंचाई पर कोई अन्य ध्वज स्थापित नहीं किया जा सकता, न ही एक ही पोल पर दो झंडे लगाए जा सकते हैं। गाड़ियों पर तिरंगा लगाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल जैसे गिने-चुने संवैधानिक पदों तक ही सीमित रखा गया है, जिसका उल्लंघन संहिता के विरुद्ध माना जाएगा।