टैक्स कलेक्शन में तेजी: चालू वित्त वर्ष में रिफंड के बाद ₹8.11 लाख करोड़ पर पहुंचा डायरेक्ट टैक्स

टैक्स कलेक्शन में तेजी: चालू वित्त वर्ष में रिफंड के बाद ₹8.11 लाख करोड़ पर पहुंचा डायरेक्ट टैक्स

केंद्र सरकार के कर राजस्व में चालू वित्त वर्ष के दौरान जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 10 अगस्त तक देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 23.09 प्रतिशत बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है। पिछले वित्त वर्ष की इसी समान अवधि में यह आंकड़ा 6.59 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।

जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, रिफंड से पहले का सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 19.75 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 9.55 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो गत वर्ष की समान अवधि में 7.97 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह कर संग्रह में 1.57 लाख करोड़ रुपये की सीधी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इस अवधि में सरकार ने करदाताओं को 1.43 लाख करोड़ रुपये का रिफंड भी जारी किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.79 प्रतिशत अधिक है।

विभिन्न श्रेणियों के आधार पर, शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह में बढ़त दर्ज करते हुए यह 2.26 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.70 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं सकल कॉरपोरेट कर संग्रह 3.32 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3.80 लाख करोड़ रुपये रहा। दूसरी तरफ, शुद्ध गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह भी 4.11 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 5.07 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जबकि इसका सकल संग्रह 4.43 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 5.41 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

वित्तीय बाजारों से प्राप्त होने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) के संग्रह में भी उछाल देखा गया। एसटीटी का शुद्ध संग्रह पिछले वित्त वर्ष के 22,354.31 करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर 33,823.74 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, अन्य करों का सकल संग्रह घटकर 14.33 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल समान अवधि में 282.96 करोड़ रुपये था। इन संपूर्ण आंकड़ों में व्यक्तिगत करदाताओं, कंपनियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF), फर्मों, व्यक्तियों के संघ (AOP) और स्थानीय प्राधिकरणों का कर भुगतान सम्मिलित है।

सरकारी खजाने की स्थिति पर नजर डालें तो चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में राजकोषीय घाटा 3.1 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो चालू वर्ष के कुल बजट लक्ष्य का 18.2 फीसदी है। बीते वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 2.8 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 16.96 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी के 4.3 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा रखने का बजटीय अनुमान निर्धारित किया है, जो राजकोषीय अनुशासन की योजना के मुताबिक है।

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भी देश की कर प्राप्तियों का रुख सकारात्मक बना हुआ है। अप्रैल-जून की अवधि में शुद्ध कर प्राप्तियां 5.4 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 6.4 लाख करोड़ रुपये हो गईं। यह वृद्धि प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों कर मोर्चों पर बनी मजबूती को रेखांकित करती है।

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