संसद का मानसून सत्र गुरुवार को हंगामे की भेंट चढ़ गया, जब लोकसभा और राज्यसभा दोनों की बैठकों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र के आखिरी दिन संसद परिसर में सरकार और विपक्ष के बीच गहरा राजनीतिक गतिरोध देखने को मिला। इसके चलते अंतिम दिन विधायी प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से पूरा नहीं किया जा सका और सत्र का समापन हो गया।
सुबह के समय लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने वेल में आकर विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी के बावजूद व्यवस्था नहीं बन सकी। परिस्थिति को देखते हुए पीठासीन अधिकारी ने सुबह करीब 11:05 बजे ही सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया, जबकि परंपरा के अनुसार अंतिम दिन सत्र शाम तक चलता है।
उधर ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में कार्यवाही के शुरुआती चरण में ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को बहस के बाद पारित कर दिया गया। लेकिन इसके तुरंत बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में अपने कार्यक्रम के बाद हुए कथित शुद्धिकरण का मामला पटल पर रखा। इस विषय को लेकर विपक्षी दलों ने तीखा ऐतराज जताया और हंगामा शुरू कर दिया।
सदन में उत्पन्न इस गतिरोध के तत्काल बाद राज्यसभा को भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया गया। इस प्रकार दोनों सदनों की कार्यवाही समाप्त होने के साथ ही संसद का मानसून सत्र संपन्न हो गया। हालांकि इस सत्र की अवधि में कई विधायी कार्य पूरे किए गए और विधेयकों को पारित किया गया, परंतु अंतिम दिन हुआ भारी हंगामा सामान्य कामकाज के मार्ग में बड़ी बाधा बना।