केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि आधुनिक तकनीक के समावेश से देश की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सुगम, त्वरित और प्रभावी बन रही है। लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (एलडीबी) द्वारा 10 करोड़ एक्जिम (आयात-निर्यात) कंटेनरों को सफलतापूर्वक ट्रैक करने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर उन्होंने यह बात कही। उन्होंने रेखांकित किया कि इस प्रगति से घरेलू उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ रही है और देश के उत्पादन तथा निर्यात लक्ष्यों को नई गति मिल रही है।
केंद्रीय मंत्री ने इस मील के पत्थर को भारतीय लॉजिस्टिक्स यात्रा की एक बड़ी सफलता बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सुदृढ़ और सक्षम लॉजिस्टिक्स ढांचा देश में विनिर्माण को सशक्त करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की उपस्थिति को व्यापक बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही यह प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को धरातल पर उतारने में भी केंद्रीय आधार बनेगा।
आरएफआईडी (RFID) आधारित ट्रैकिंग प्रणाली पर काम करने वाला लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक वर्तमान में पूरे देश में आयात-निर्यात से जुड़े शत-प्रतिशत कंटेनरों की निर्बाध और शुरू से अंत तक की निगरानी सुनिश्चित कर रहा है। इस डिजिटल नेटवर्क की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके दायरे में देश के 19 प्रमुख बंदरगाह और 32 कंटेनर टर्मिनल पूरी तरह शामिल हैं।
इसके अलावा, यह विशाल तंत्र 103 इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी), 439 कंटेनर फ्रेट स्टेशन (सीएफएस), खाली कंटेनर यार्डों, पार्किंग प्लाजा और औद्योगिक क्षेत्रों तक फैला हुआ है। नेटवर्क के अंतर्गत 89 विनिर्माण विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड), 5,569 रेलवे स्टेशन, 269 टोल प्लाजा और तीन इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट भी जुड़े हुए हैं, जो कंटेनरों के आवागमन पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखते हैं।
यह डिजिटल प्लेटफॉर्म आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हितधारकों को ड्वेल टाइम, पारगमन समय (ट्रांजिट टाइम) तथा बंदरगाहों व टर्मिनलों के कार्य प्रदर्शन से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा विश्लेषण उपलब्ध कराता है। इस सटीक जानकारी की सहायता से आयातक, निर्यातक, लॉजिस्टिक्स संचालक और नीति निर्धारक परिचालन संबंधी बाधाओं की समय पर पहचान कर व्यवस्था में जरूरी सुधार कर पाते हैं।
उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्वारा एलडीबी 2.0 का शुभारंभ किया गया था, जिससे इस प्रणाली की क्षमता का और अधिक विस्तार हुआ। इस उन्नत संस्करण के माध्यम से भारत से निर्यात होने वाले कंटेनरों की गहरे समुद्र (हाई-सीज) में भी ट्रैकिंग संभव हुई है और मल्टी-मॉडल शिपमेंट की संपूर्ण निगरानी की सुविधा मिली है, जिससे माल की आवाजाही को अधिक व्यापक रूप से ट्रैक किया जा रहा है।