भारतीय तलवारबाजी (फेंसिंग) दल ने कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप 2026 में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए ओवरऑल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया है। चार दिनों तक चले इस टूर्नामेंट में भारतीय दल ने सीनियर और अंडर-23 दोनों वर्गों में शानदार खेल दिखाया। भारत 13 स्वर्ण, 8 रजत और 14 कांस्य समेत कुल 35 पदक जीतकर पदक तालिका में शीर्ष पर रहा और 1982 से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले देश को दी जाने वाली प्रतिष्ठित विल्किंसन स्वॉर्ड ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।
सीनियर टीम स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुए छह में से पांच मुकाबलों में स्वर्ण पदक जीते। भारतीय टीम ने पुरुष सेबर, महिला सेबर, पुरुष एपी, महिला एपी और महिला फॉयल में पहला स्थान हासिल किया, जबकि पुरुष फॉयल स्पर्धा में कड़े संघर्ष के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इस शानदार प्रदर्शन ने पदक तालिका में भारत की शीर्ष स्थिति को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया।
लागोस में आयोजित इस चैंपियनशिप के पहले दिन भारत के अंडर-23 खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। भारतीय दल ने 4 स्वर्ण, 4 रजत और 9 कांस्य के साथ कुल 17 पदक जीते। पुरुष सेबर स्पर्धा में निखिल वाघ के नेतृत्व में भारतीय दल ने पोडियम पर क्लीन स्वीप किया। वहीं व्यक्तिगत स्पर्धाओं में जॉइस अशिता (महिला फॉयल), प्राची लोहान (महिला एपी) और जेफरलिन (महिला सेबर) ने स्वर्ण पदक हासिल किए।
प्रतियोगिता के दूसरे दिन सीनियर व्यक्तिगत मुकाबलों में भारतीय फेंसर्स ने 1 स्वर्ण, 2 रजत और 4 कांस्य समेत 7 पदक जीते, जिसमें सीनियर महिला एपी में तनिष्का खत्री का स्वर्ण और खुशी दाभाड़े का रजत प्रमुख रहा। तीसरे दिन भारत ने 3 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य के साथ 5 पदक जोड़े। इस दौरान कनागलक्ष्मी (सीनियर महिला फॉयल), राजेंद्रन शांतिमोली शेरजिन (सीनियर पुरुष एपी) और सिंह करण सिंह (सीनियर पुरुष सेबर) ने स्वर्ण पदक जीतकर टीम को मजबूती दी।
खिलाड़ियों के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन में सहयोगी स्टाफ का मार्गदर्शन और प्रबंधन भी काफी अहम रहा। कोच भरतजी ठाकोर, श्रीहरि पिसे और शंकर नारायणन की रणनीतिक योजना, फिजियोथेरेपिस्ट अमृता बालकावाड़े की देखरेख और टीम मैनेजर मनु त्यागी के कुशल प्रबंधन ने पूरे टूर्नामेंट में खिलाड़ियों की फिटनेस और फॉर्म को बनाए रखा।
फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव राजीव मेहता ने खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और सहयोगी स्टाफ को बधाई देते हुए कहा कि पहली बार कॉमनवेल्थ का ओवरऑल खिताब जीतना खिलाड़ियों के अनुशासन, प्रतिभा और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस उपलब्धि से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय फेंसर्स का मनोबल बढ़ेगा और आगामी वैश्विक प्रतियोगिताओं के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार होगा।