केंद्र सरकार द्वारा मंगलवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, हाल के वर्षों में संपन्न हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से देश के विदेशी व्यापार को उल्लेखनीय गति मिली है। साझेदार मुल्कों के साथ भारत के निर्यात में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है, जिससे न केवल वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ी है, बल्कि घरेलू कारोबारी इन समझौतों के तहत मिल रही टैरिफ छूट का भी बड़े पैमाने पर लाभ ले रहे हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 863.1 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसमें माल (मर्चेंडाइज) निर्यात का योगदान 441.8 अरब डॉलर रहा। निर्यात वृद्धि का यह सकारात्मक रुझान चालू वित्त वर्ष में भी बना हुआ है। अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के दौरान देश का कुल निर्यात 11.37 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ 232.73 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है।
फैक्टशीट में उल्लेख किया गया है कि देश के कुल निर्यात में व्यापार साझेदार देशों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से वर्ष 2022 से प्रभावी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) और ऑस्ट्रेलिया के साथ आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) के मजबूत परिणाम सामने आए हैं। यूएई को किया जाने वाला भारतीय निर्यात 37.35 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जबकि ऑस्ट्रेलिया को हुआ निर्यात 7.28 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। सरकार की इन व्यापारिक पहलों से छोटे और मध्यम उद्यमों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का मंच मिला है।
रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी व्यापार समझौते की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि निर्यातक शुल्क रियायतों का कितना प्रभावी उपयोग कर रहे हैं। निर्धारित मूल नियमों (रूल्स ऑफ ओरिजिन) की पूर्ति के बाद जारी किए जाने वाले ‘प्रेफरेंशियल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन’ (सीओओ) के उपयोग में भारी वृद्धि देखी गई है। यह प्रमाण पत्र आयातक देश में शून्य अथवा रियायती सीमा शुल्क का लाभ दिलाने की पुष्टि करता है।
हाल ही में लागू हुए नए व्यापार समझौतों के मोर्चे पर भी उत्साहजनक प्रगति दर्ज हुई है। अक्टूबर 2025 में लागू हुए यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए-टीईपीए) के तहत अब तक 7,885 मूल प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि जून 2026 से प्रभावी ओमान सीईपीए के अंतर्गत 783 प्रमाणपत्र जारी हुए हैं। सरकार द्वारा प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और सरलीकरण से भारतीय उद्यमी इन वैश्विक अवसरों का तेजी से लाभ उठा रहे हैं।