बेंगलुरु में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय उच्चस्तरीय ‘उद्योग आउटरीच कार्यक्रम’ में मध्यप्रदेश को भविष्य का प्रमुख आईटी और स्पेसटेक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ संकल्प के तहत आयोजित इस बैठक में राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी), टेक्नोलॉजी इनेबलर्स और स्पेसटेक विशेषज्ञों के साथ सीधा संवाद किया।
कार्यक्रम के तहत प्रतिनिधिमंडल ने वैश्विक जीसीसी संचालक संस्था ‘एएनएसआर’ (ANSR) के बेंगलुरु परिसर का दौरा किया। यहाँ ’90 दिनों में जीसीसी’ मॉडल पर विचार-विमर्श हुआ, जो एकल खिड़की प्रणाली (सिंगल विंडो क्लीयरेंस) के माध्यम से वैधानिक पंजीकरण, लीज और प्रतिभा चयन की प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करता है। इस बातचीत के बाद एएनएसआर ने इंदौर में अपना नया केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। कंपनी जल्द ही इसका औपचारिक प्रस्ताव सौंपेगी और अंतरिम रूप से किराए के परिसर से कामकाज शुरू करेगी।
पहले गोलमेज सत्र में टीयर-2 शहरों में जीसीसी इकोसिस्टम के विस्तार पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि इंदौर और भोपाल में रियल एस्टेट के साथ-साथ उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थानों से निकलने वाली प्रतिभाएं राज्य को मजबूत ‘हब-एंड-स्पोक मॉडल’ बनाने का आधार प्रदान करती हैं। बैठक में नैसकॉम, सीआईआई, फिक्की, क्वेस कॉर्प और कारगिल जैसी प्रमुख संस्थाओं ने कौशल विकास और फिनिशिंग स्कूलों की आवश्यकता पर जोर दिया। इसी क्रम में एनिमेशन उद्योग संगठन (ABAI) ने दोनों शहरों में ‘एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
दूसरे सत्र के दौरान मध्यप्रदेश के प्रस्तावित ‘स्पेसटेक क्लस्टर’ की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पेश की गई। प्रतिनिधियों ने बताया कि भोपाल स्थित इसरो (ISRO) की मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी, मजबूत रक्षा विनिर्माण आधार और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति राज्य को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अग्रणी बनाने के लिए पूरी तरह अनुकूल हैं। इसके अंतर्गत सैटेलाइट सिस्टम, ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेस स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन सहायता देने पर सहमति बनी।
बेंगलुरु में हुए इस संवाद से राज्य में जीसीसी, एवीजीसी और स्पेसटेक के क्षेत्रों में निवेश के नए मार्ग खुले हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अब एएनएसआर के इंदौर प्रोजेक्ट, एवीजीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और स्पेसटेक क्लस्टर की डीपीआर को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा, जिससे तकनीक आधारित ‘विकसित मध्यप्रदेश’ के निर्माण को गति मिल सके।