केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में आसूचना ब्यूरो के ‘राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन’ के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर व विकसित भारत के निर्माण के लिए अभेद्य आंतरिक सुरक्षा सबसे अनिवार्य आवश्यकता है। दो दिन तक चले इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी और केंद्रीय जांच व खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी प्रत्यक्ष और डिजिटल माध्यम से जुड़े।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षा तंत्र को अगले 15-20 वर्षों के वैश्विक परिदृश्यों का विश्लेषण कर दूरगामी योजनाएं बनानी चाहिए। सुरक्षा का मूल सिद्धांत यही है कि किसी भी समस्या को विकराल रूप लेने से पहले ही उसके उद्भव के समय समाप्त कर दिया जाए। उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर में अशांति, वामपंथी उग्रवाद और मादक पदार्थों के नेटवर्क जैसे तीनों प्रमुख आंतरिक सुरक्षा संकटों को राज्य पुलिस बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और राष्ट्रीय एजेंसियों के साझे तालमेल से निष्प्रभावी कर दिया गया है।
न्यायिक सुधारों की चर्चा करते हुए अमित शाह ने कहा कि नई आपराधिक न्याय संहिताओं, फॉरेंसिक नेटवर्क के विस्तार और तकनीक के उन्नयन से न्याय प्रक्रिया त्वरित होगी। फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के जरिए प्रतिवर्ष 37,000 विशेषज्ञ तैयार हो रहे हैं। अगले एक साल में इन तीनों संहिताओं के पूर्ण क्रियान्वयन के साथ मामलों के तीन वर्षों में सर्वोच्च न्यायालय तक निस्तारण और कनविक्शन रेट में 25 फीसदी सुधार का लक्ष्य है। उन्होंने पीएफआई के नेटवर्क को रातों-रात ध्वस्त करने की कार्रवाई को संघवाद और सुरक्षा एजेंसियों के आपसी तालमेल की बड़ी सफलता बताया।
आतंकवाद के 360-डिग्री नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए उन्होंने ‘प्रहार’ को पुलिसिंग के बुनियादी संस्कार के रूप में अपनाने और इसे डीवाईएसपी स्तर तक ले जाने का निर्देश दिया। मादक पदार्थों के खिलाफ ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ के आधार पर Detect, Disrupt और Destroy की त्रिस्तरीय कार्ययोजना लागू करने को कहा गया। सीमा प्रबंधन पर बोलते हुए गृह मंत्री ने कहा कि बीते आठ माह के दौरान जमीनी सीमा वाले राज्यों के साथ ‘चतुष्कोणीय सीमा सुरक्षा’ प्रारूप साझा किया गया है और प्रत्येक राज्य में आईजी/एडीजी स्तर के नोडल अधिकारी की तैनाती प्रस्तावित की गई है, जिससे देश को पूर्णतः घुसपैठ मुक्त बनाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल वैध नागरिकों को ही देश में रहने का अधिकार है और घुसपैठिए देश के संसाधनों व जनसांख्यिकी पर सीधा प्रहार करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून के प्रवर्तन का ब्यौरा देते हुए गृह मंत्री ने बताया कि मजबूत हुए तंत्र के चलते 2019 से 2026 की अवधि में लगभग 274 आर्थिक व आपराधिक भगोड़ों को विदेश से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। उन्होंने मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के तकनीकी ढांचे को चार गुना बढ़ाने और CCTNS, ICJS, NatGrid व NAFIS के एकीकृत डेटा पर एआई (AI) आधारित विश्लेषण को बढ़ावा देने का आह्वान किया। इसके अतिरिक्त, वैश्विक अनिश्चितताओं, ऊर्जा संकट व साइबर खतरों से निपटने की तैयारी के साथ-साथ उन्होंने देश के सभी समुद्री सीमावर्ती जिलों के साथ एक ठोस व समयबद्ध सुरक्षा रोडमैप तैयार करने पर विशेष बल दिया।