ग्रामीण विकास को नई दिशा: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया ‘मिशन समृद्ध गाँव’, बुदनी और खातेगांव से होगी पायलट शुरुआत

ग्रामीण विकास को नई दिशा: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया ‘मिशन समृद्ध गाँव’, बुदनी और खातेगांव से होगी पायलट शुरुआत

नई दिल्ली में मंगलवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा ‘मिशन समृद्ध गाँव’ योजना का विधिवत आगाज़ किया गया। इस योजना की रूपरेखा गांवों को बुनियादी सुविधाओं से संपन्न करने, निर्धनता समाप्त करने और स्थानीय स्तर पर आजीविका उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई है, जिससे ग्रामीणों को पलायन न करना पड़े।

कार्ययोजना के अंतर्गत विकास का खाका परिवार, पंचायत और ब्लॉक तीनों स्तरों पर तैयार होगा। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले स्थित बुदनी तथा देवास जिले के खातेगांव ब्लॉक को इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुना गया है। इन क्षेत्रों में सरकारी कार्यक्रमों के अभिसरण के माध्यम से एक व्यावहारिक मॉडल स्थापित किया जाएगा, जिसे बाद में राष्ट्रीय स्तर पर चरणबद्ध रूप से विस्तारित करने की योजना है।

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम केवल खेती-किसानी तक सीमित न रहकर शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों को समाहित करेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाना ही उनकी प्राथमिकता है और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना ही उनके जीवन का उद्देश्य है। इस मिशन में नागरिक समाज, पंचायती राज संस्थाओं, सरकारी विभागों तथा गेट्स फाउंडेशन, एक्सिस बैंक फाउंडेशन, ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन, सिटीबैंक और एचएसबीसी जैसे वैश्विक व वित्तीय संस्थानों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है।

मिशन में महिला कृषकों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन देने और महिलाओं को विभिन्न आजीविका कार्यक्रमों से जोड़ने पर मुख्य बल रहेगा। श्री चौहान ने ‘लखपति दीदी’ मॉडल की सफलता का हवाला देते हुए इसे व्यापक स्तर पर दोहराने की बात कही। साथ ही, सीमित जोत वाले किसानों के लाभार्थ एकीकृत कृषि प्रणाली के अंतर्गत फल-सब्जी उत्पादन, डेयरी, मत्स्य पालन, पशुपालन और मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय स्थिरता लाने के लिए वेयरहाउसिंग और फूड प्रोसेसिंग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। किसानों को अपनी उपज का प्रसंस्करण कर मूल्य संवर्धन के साथ व्यापार करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे कृषि से अधिक मुनाफा प्राप्त हो सके और गांवों में ही रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हों।

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