तीर्थ क्षेत्र ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में गुरुवार की सुबह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पारंपरिक पंचायतन मंदिर की आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी सीमा यादव, भारत की प्राचीन संन्यास परंपरा के प्रतिनिधियों और षड्दर्शन संत मंडल के पूज्य संतों की उपस्थिति में 45 पावन शिलाओं का विधिपूर्वक पूजन कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया।
यह संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम् (धर्मगिरि, आंध्र प्रदेश) के प्राचार्य के.एस.एस. अवधानी, दक्षिणाम्नाय श्री शारदा पीठम् (कर्नाटक) और श्री श्री गुरुकुल के विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में पूरा हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों के आशीर्वाद से साकार हो रहा यह धाम भावी पीढ़ियों के चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक चेतना के जागरण का माध्यम बनेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि पंचायतन उपासना का मूल भाव विभिन्न देव स्वरूपों के माध्यम से एक ही परम ब्रह्म की आराधना करना है, जो भारतीय संस्कृति के एकात्म दृष्टिकोण का आधार है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश की आध्यात्मिक शक्ति का विस्तार वैश्विक पटल पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय शुरू हुए इस प्रकल्प को वर्तमान सरकार पूरी तत्परता से पूरा कर रही है। समाज के विघ्नों और आसुरी प्रवृत्तियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि संतों के आशीर्वाद, मां नर्मदा के अनुग्रह और आदि शंकराचार्य की प्रेरणा से सभी बाधाएं दूर होंगी और संकल्प सिद्ध होंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मांधाता पर्वत पर स्थापित हो रहा यह परिसर आने वाले समय में अलौकिक आध्यात्मिक वातावरण प्रस्तुत करेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 के सिंहस्थ महापर्व से पहले एक विशाल एकात्म यात्रा निकाली जाएगी, जो सिंहस्थ में पूर्ण होगी। इस यात्रा के माध्यम से सनातन विचार और संत परंपरा का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा। इसके साथ ही ओंकारेश्वर और उज्जैन दोनों प्रमुख क्षेत्र देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आंतरिक चेतना और शोध-जिज्ञासा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होंगे।
स्थापत्य की दृष्टि से यह मंदिर प्राचीन नागर शैली और भारतीय मूर्तिकला का उत्कृष्ट उदाहरण होगा। इसके मध्य में भगवान शिव का मुख्य मंदिर तथा चारों कोनों पर सूर्य, विष्णु, गणेश और शक्ति के देवालय होंगे। 16 फीट ऊंची जगति पर आकार लेने वाले इस मंदिर का गर्भगृह ‘सर्वतोभद्र’ (चारों दिशाओं से प्रवेश योग्य) और शिखर ‘सोमतिलक’ शैली का होगा। मंदिर के निर्माण में लगभग 80,000 घन फीट तराशे हुए गुलाबी बलुआ पत्थर, 100 कलात्मक स्तंभ, 26 फीट चौड़े गुंबद, 121 कलश, भद्र, कर्ण, प्रतिरथ, देवकोष्ठ और भव्य तोरण-द्वारों का संयोजन रहेगा। शिलान्यास समारोह में संत समाज के साथ अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और श्रद्धालु शामिल हुए।