नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही: भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री, बचाव कार्य के लिए बेली ब्रिज भी देगा

नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही: भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री, बचाव कार्य के लिए बेली ब्रिज भी देगा

नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ के बाद भारत सरकार ने त्वरित मानवीय सहायता उपलब्ध कराते हुए गुरुवार को 47.5 टन राहत सामग्री पहुंचाई। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में जानकारी दी कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और संपर्क व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए भारत जल्द ही बेली ब्रिज भी उपलब्ध कराएगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि राहत सामग्री पहुंचाने के लिए दो विशेष सैन्य विमानों का उपयोग किया गया। पहला सी-130जे विमान बुधवार रात करीब 8:30 बजे 10 टन आपूर्ति लेकर रवाना हुआ था, जिसमें दवाइयां, अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट और सोलर लैंप शामिल थे। इसके बाद गुरुवार सुबह एक सी-17 विमान 37.5 टन सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचा। इस दूसरी खेप में 28.5 टन आपातकालीन सामग्री (टेंट, कंबल, जल निकासी पंप, जेनसेट, किचन सेट और सोलर लैंप), आठ टन दवाएं और एक टन खाद्य सामग्री शामिल थी।

प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि दो उड़ानों के माध्यम से अब तक कुल 47.5 टन सामग्री पहुंचाई जा चुकी है और आवश्यकतानुसार आगे की सहायता पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही, राहत दलों की आवाजाही और स्थानीय कनेक्टिविटी बहाल करने के उद्देश्य से बेली ब्रिज जुटाने की प्रक्रिया जारी है।

आपदा से उत्पन्न स्थिति पर नजर रखने के लिए विदेश मंत्रालय ने 24 घंटे सक्रिय रहने वाला एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है, जिसकी संपर्क जानकारी आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर उपलब्ध कराई गई है। काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों में भी चौबीसों घंटे काम करने वाली हेल्पलाइन शुरू की गई हैं। विदेश मंत्रालय गृह मंत्रालय के समन्वय से उन सभी राज्य सरकारों के संपर्क में है, जहां के श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हैं।

यह तबाही चीन के तिब्बती क्षेत्र से शुरू होकर सीमा पार बहने वाली भोटे कोशी नदी में आए भारी उफान के कारण हुई है। नेपाल पुलिस द्वारा गुरुवार दोपहर दी गई जानकारी के अनुसार, बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 270 हो गई है। नदी के बहाव वाले क्षेत्रों में तलाश अभियान जारी है। अब तक सबसे अधिक 108 शव दक्षिणी मैदानी क्षेत्र के चितवन जिले से मिले हैं, जबकि नवलपरासी ईस्ट से 62, धाडिंग से 27 और रसुवा से 17 शव बरामद किए गए हैं।

नेपाली अधिकारियों के अनुसार, रिहायशी इलाकों, सीमा शुल्क कार्यालयों, बिजली आपूर्ति तंत्र और जलविद्युत परियोजनाओं के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण 800 से अधिक लोग अब भी लापता हैं, जिनसे संपर्क स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *