वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने के उद्देश्य से दुनिया के प्रमुख देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर सोमवार को नॉर्थ कैरोलिना के एशविल में दो दिवसीय सम्मेलन के लिए एकत्र हुए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की अध्यक्षता में आयोजित इस जी20 बैठक का मुख्य फोकस व्यापारिक तनाव, बढ़ते सार्वजनिक कर्ज और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक विकास को नई गति देने पर रहेगा।
अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उसकी जी20 अध्यक्षता का मुख्य लक्ष्य आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देना है। अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने सम्मेलन से पूर्व कहा कि जिस तरह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने को प्राथमिकता दे रहे हैं, उसी तरह अमेरिकी मेजबानी में जी20 का एजेंडा भी तेज विकास पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर यह संदेश देना अनिवार्य है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि संभव होने के साथ-साथ अत्यंत आवश्यक भी है।
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कर रही हैं। वे रविवार को साउथ कैरोलाइना के ग्रीनविले-स्पार्टनबर्ग हवाई अड्डे पहुंचीं, जहां अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने उनका स्वागत किया। वहीं अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट और फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श संयुक्त रूप से जॉइंट बेस एंड्रयूज से विमान द्वारा कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। इनके अलावा सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान, जापान की वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा और बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा समेत जी20 के 19 सदस्य देशों, यूरोपीय संघ, अफ्रीकी संघ और प्रमुख वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हो रहे हैं।
सम्मेलन के एजेंडे में वैश्विक असंतुलन दूर करने, संप्रभु कर्ज की समस्याओं का समाधान तलाशने और प्रमुख आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने जैसे विषय शामिल हैं। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि राष्ट्रों को सब्सिडी और अत्यधिक उत्पादन आधारित निर्यात पर निर्भर रहने के बजाय नवाचार, उच्च उत्पादकता और निवेश के जरिए प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए। हालांकि अमेरिका ने किसी देश का सीधा नाम नहीं लिया, लेकिन यह रुख चीनी विनिर्माण की अतिरिक्त क्षमता को लेकर उसकी पुरानी चिंताओं से जुड़ा माना जा रहा है।
यह बैठक ऐसे संवेदनशील समय में हो रही है जब ईरान संकट के कारण ऊर्जा की कीमतों और होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री व्यापार पर विपरीत असर पड़ा है। अमेरिका इस मंच से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की वकालत कर सकता है, हालांकि सदस्य देशों के अलग-अलग हितों के चलते साझा सहमति बनना चुनौतीपूर्ण होगा। इस बीच सऊदी वित्त मंत्री अल-जदान ने उम्मीद जताई कि समूह के देश साझा प्रयासों से विकास, स्थिरता और समृद्धि के एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे।
विकासशील देशों के कर्ज संकट और निजी निवेश के नियमों को सुगम बनाने के लिए निजी क्षेत्र व तकनीकी उद्योग के दिग्गजों को भी परिचर्चा में शामिल किया गया है। भू-राजनीतिक और व्यापारिक मतभेदों को देखते हुए सम्मेलन के अंत में किसी विस्तृत साझा बयान के बजाय अध्यक्षीय सारांश आने की संभावना जताई जा रही है। एशविल में होने वाली यह बैठक दिसंबर में मियामी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में आयोजित होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन की आर्थिक रूपरेखा तय करेगी।