मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के समग्र विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूती देने के लिए 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों व जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई। राज्य के ग्रामीण परिवेश को आर्थिक और ढांचागत रूप से सशक्त बनाने के लिए कैबिनेट ने 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होने वाली ‘विकसित भारत: वीबी जी राम जी योजना’ के क्रियान्वयन हेतु 29 हजार 619 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाई। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को अब प्रति वित्तीय वर्ष 100 दिन के स्थान पर 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी मिलेगी। यह योजना 60:40 के केंद्रांश-राज्यांश अनुपात पर संचालित होगी, जिसमें आगामी पांच वर्षों में राज्य का कुल वित्तीय अंश 10,574 करोड़ रुपये और प्रशासनिक व्यय 946 करोड़ रुपये रहेगा। योजना के पारदर्शी संचालन के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी, डिजिटल मस्टर रोल, छह-माही सामाजिक अंकेक्षण और जिला स्तर पर डिजिटल लोकपाल की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।
सड़क अधोसंरचना के क्षेत्र में कैबिनेट ने दो प्रमुख राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दी। भोपाल शहर को भारी यातायात के दबाव से मुक्त करने और इंदौर-जबलपुर मार्ग पर 21 किलोमीटर की दूरी घटाने के लिए 35.61 किमी लंबे ‘पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन’ के निर्माण हेतु 3,774 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। रातापानी टाइगर रिजर्व, बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र और समसगढ़ स्थित प्राचीन शिव मंदिर के संरक्षण को देखते हुए इसके मूल रेखण में आवश्यक बदलाव किए गए हैं। वहीं, बीना रिफाइनरी और थर्मल पावर प्लांट क्षेत्र में औद्योगिक यातायात को सुगम बनाने के लिए एनएच-346 से एनएच-44 को जोड़ने वाले 67.116 किमी लंबे ‘मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन 4-लेन मार्ग’ के निर्माण हेतु 3,272 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। दोनों ही परियोजनाएं हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) पर निर्मित होंगी।
उच्च व तकनीकी शिक्षा में क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) का पुनर्गठन कर तीन नए स्वायत्त तकनीकी विश्वविद्यालय स्थापित करने का ऐतिहासिक फैसला हुआ। इसके तहत भोपाल में ‘मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’, उज्जैन में ‘मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ और जबलपुर में ‘महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ का गठन किया जाएगा। प्रदेश के सभी इंजीनियरिंग व तकनीकी महाविद्यालयों को संभागवार इन तीनों विश्वविद्यालयों के अधिकार क्षेत्र में बांटा गया है। इसके अलावा, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के आर्थिक उत्थान और ‘सांची’ ब्रांड के विस्तार के लिए 2,973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास परियोजना स्वीकृत की गई। इस योजना के जरिए अगले पांच वर्षों में दुग्ध संकलन को 12 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन करने और सहकारी समितियों का दायरा 7,331 से बढ़ाकर 26,000 गांवों तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।
कृषि एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार करते हुए कैबिनेट ने रबी विपणन वर्ष 2026 में समर्थन मूल्य योजना के तहत पंजीकृत किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन की सीमा को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के पूर्व निर्णय का अनुसमर्थन किया। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रदेश के अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों और विभागीय परिसंपत्तियों (जैसे मॉड्यूलर ओटी और किचन) के रखरखाव हेतु वर्ष 2026 से 2031 की अवधि के लिए 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई। साथ ही, नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी में प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सामाजिक न्याय विभाग में 21 और आयुष विभाग में 20 नए पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई।