एमएसएमई ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ के विजन को अपनाकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनें: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

एमएसएमई ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ के विजन को अपनाकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनें: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक एमएसएमई सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की विनिर्माण रणनीति ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड’ के आधारभूत सिद्धांत पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने छोटे एवं मध्यम उद्योगों का आह्वान किया कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उभरते नए अवसरों का लाभ उठाएं और खुद को विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धी कंपनियों के रूप में स्थापित करें।

रक्षा मंत्री ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से आग्रह किया कि वे अपने वार्षिक कारोबार का एक हिस्सा अनुसंधान, विकास और आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने में लगाएं। उन्होंने उद्योगों की तकनीकी क्षमता को सशक्त बनाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालयों, आईआईटी, शोध संस्थानों, डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स और बड़े औद्योगिक घरानों के साथ रणनीतिक साझेदारी विकसित करने पर विशेष बल दिया।

‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह विजन एक ऐसे समर्थ राष्ट्र की परिकल्पना करता है जो विनिर्माण क्षेत्र में विश्वस्तरीय हो, प्रौद्योगिकी और नवाचार में अग्रणी भूमिका निभाए तथा सामरिक व आर्थिक रूप से पूर्णतः आत्मनिर्भर होकर देश के युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर जुटाए। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रहे बदलावों और भरोसेमंद विनिर्माण सहयोगियों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग के बीच भारतीय उद्यमियों के पास वैश्विक बाजार में अपनी पैठ मजबूत करने का उपयुक्त अवसर है।

द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ओमान, स्विट्जरलैंड और यूरोपीय संघ सहित प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि ये व्यापारिक समझौते एमएसएमई क्षेत्र के लिए वैश्विक व्यापार और निर्यात के व्यापक मार्ग प्रशस्त करते हैं। ऐसे में उद्यमियों को ऋण गारंटी विस्तार और जीएसटी के सरलीकरण जैसी सरकारी नीतियों का पूर्ण लाभ उठाकर अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना चाहिए।

देश में उद्यमशीलता के विस्तार का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2012-13 में जहां एमएसएमई की संख्या करीब 4.67 करोड़ थी, वहीं वर्तमान में यह बढ़कर लगभग 8 करोड़ तक पहुंच चुकी है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर्स, ऑटोनॉमस सिस्टम्स, एडवांस्ड मैटेरियल्स, अंतरिक्ष और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों को एमएसएमई के भविष्य के विस्तार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

गुणवत्ता मानकों पर बल देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय विनिर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान उत्कृष्टता और विश्वसनीयता के दम पर कायम करनी चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में यह पहलू और भी संवेदनशील हो जाता है, क्योंकि उपकरण के प्रत्येक कलपुर्जे की उच्च गुणवत्ता सीधे तौर पर सशस्त्र बलों की परिचालन दक्षता और सुरक्षा से जुड़ी होती है।

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