चीनी की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से आयात की अनुमति दिए जाने और स्टॉक सीमा तय किए जाने के बाद देश भर में चीनी की औसत खुदरा कीमत एक सप्ताह के भीतर 3.85 फीसदी घटकर 62.57 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी विवरण के अनुसार, एक सप्ताह पूर्व चीनी की खुदरा दर 65.08 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यद्यपि बीते हफ्ते कीमतों में कमी आई है, लेकिन पिछले महीने दर्ज 49.33 रुपये प्रति किलोग्राम के मूल्य की तुलना में यह दर अब भी करीब 27 प्रतिशत ज्यादा बनी हुई है।
मंत्रालय के आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि थोक बाजार में चीनी की दरों में नरमी दर्ज की गई है। दो सितंबर को चीनी का औसत थोक मूल्य घटकर 57.62 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया, जबकि एक सप्ताह पहले यही भाव 60.39 रुपये प्रति किलोग्राम था।
सूत्रों के अनुसार, थोक कीमतों में आई कमी फौरन आम ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाती है। इसका मुख्य कारण यह है कि अधिकांश खुदरा व्यापारियों ने पिछला माल ऊंची लागत पर खरीदा हुआ है, जिसे वे आर्थिक नुकसान उठाकर बेचने से बचते हैं। औसतन एक दुकानदार के पास 50 किलोग्राम वाली लगभग 10 से 15 बोरियों का स्टॉक होता है। खुदरा स्तर पर राहत तभी परिलक्षित होती है जब दुकानदार कम लागत पर नया माल मंगवाते हैं।
उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि खुदरा दरों में बदलाव का व्यावहारिक प्रभाव सामने आने में कम से कम 10 दिनों की अवधि लगती है। बाजार को संतुलित करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन चीनी के आयात को मंजूरी दी है और थोक खरीदारों व व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की शर्तों को कड़ा किया है।
केंद्र सरकार का कहना है कि देश में मांग पूरी करने लायक पर्याप्त चीनी उपलब्ध है और उसने हालिया मूल्य वृद्धि के लिए चीनी मिलों को जिम्मेदार ठहराया है। आंकड़ों के मुताबिक, विपणन वर्ष 2025-26 (अक्टूबर से सितंबर) के लिए कुल चीनी उत्पादन का अनुमान 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन किया गया है, जबकि घरेलू स्तर पर सालाना मांग 280 से 285 लाख टन रहने का आकलन है।