भोपाल में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित: राज्यपाल बोले—विकसित भारत के शिल्पकार हैं शिक्षक;

भोपाल में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित: राज्यपाल बोले—विकसित भारत के शिल्पकार हैं शिक्षक;

शिक्षक दिवस के अवसर पर शनिवार को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में ‘राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह-2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मां सरस्वती एवं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान-2026 तथा विगत वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से अलंकृत शिक्षकों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्यपाल का स्वागत पौधा भेंट कर किया, जबकि स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका अभिनंदन किया।

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि परिवार बच्चे की पहली पाठशाला होता है, जहां माता-पिता से उसे प्रारंभिक संस्कार प्राप्त होते हैं, किंतु शिक्षक ही उन संस्कारों और ज्ञान को पूर्णता प्रदान कर देश की भावी पीढ़ी का निर्माण करते हैं। उन्होंने अध्यापकों से विद्यार्थियों के प्रति आत्मीय, संवेदनशील और धैर्यवान दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। राज्यपाल ने कहा कि बच्चे विकसित भारत के कर्णधार हैं और शिक्षक उनके मुख्य शिल्पकार हैं; अतः शिक्षकों को स्वयं ज्ञान और नैतिकता का आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए वैश्विक संदर्भों, आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने पर बल दिया, ताकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारत ज्ञान की महाशक्ति बन सके।

अध्यक्षीय उद्बोधन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने शिक्षकों के हित में घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश के जिन वरिष्ठ शिक्षकों को टीईटी परीक्षा में सम्मिलित होना है, उनके लिए सरकार ऑफलाइन माध्यम से परीक्षा कराने के पूर्ण प्रबंध करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का मानचित्र कागजों पर खिंचता है, किंतु राष्ट्र का भाग्य शिक्षक अपनी कक्षाओं में तय करते हैं। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में 50 प्रतिशत से अधिक स्थान शासकीय स्कूलों के विद्यार्थी प्राप्त कर रहे हैं। राज्य सरकार सरकारी शिक्षण संस्थानों को निजी स्कूलों से भी अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए संकल्पबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए स्मरण कराया कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में 64 कलाओं और 14 विद्याओं का ज्ञान लिया था, जहां गुरु ने उनकी क्षमता पहचानकर उन्हें जगद्गुरु का मान दिया। इसी प्रकार महर्षि विश्वामित्र ने प्रभु श्रीराम के पराक्रम को पहचानकर उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाया। उन्होंने कहा कि तक्षशिला और नालंदा के माध्यम से विश्व को आलोकित करने वाला भारत आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के ध्येय के साथ आर्थिक व वैश्विक पटल पर सशक्त रूप से आगे बढ़ रहा है।

स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को मध्य प्रदेश में सर्वप्रथम लागू कराने का श्रेय तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जाता है। उन्होंने बालाघाट जैसे क्षेत्रों में अपने संसाधनों और वेतन का अंश लगाकर शालाओं को संवारने वाले कर्मठ शिक्षकों के योगदान की सराहना की। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग, विधायक श्री भगवानदास सबनानी, नगर निगम अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी और लोक शिक्षण आयुक्त श्री अभिषेक सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी व शिक्षक उपस्थित रहे।

समारोह में राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त श्रीमती शीला पटेल और श्री भैरूलाल ओसारा सहित कुल 36 शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र एवं 25 हजार रुपये की नकद राशि से सम्मानित किया गया। राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त करने वालों में श्री शिवलाल दांगी (सुसनेर), श्री धन्नालाल बिसेन व सुश्री पूनम मिश्रा (बालाघाट), श्री रीतेश कुमार पथाड़े (बैतूल), श्री सुखनंदन साहू व श्री बलराम अहिरवार (दमोह), श्री नरेंद्र कुमार भारद्वाज व श्री मुकेश कुमार शर्मा (गुना), श्री ओम प्रकाश विश्वकर्मा (नर्मदापुरम), श्री महेंद्र सिंह ठाकुर (कटनी), श्री राकेश कुमार गुप्ता व श्री मुकेश प्रजापति (मंदसौर), सुश्री शिखा शर्मा व श्री मनीष तिवारी (नरसिंहपुर), श्री लोकेंद्र सिंह पंवार (नीमच), सुश्री ज्योति पाठक (निवाड़ी), श्री राकेश कुमार वर्मा (रायसेन), श्री सुरेश चंद्र सोनी व श्री मुकेश नागर (राजगढ़), सुश्री शर्मिला उपाध्याय व श्री राजेश महेश्वरी (रतलाम), सुश्री रीनादेवी कटरे व सुश्री पूजा पांडे (सिवनी), श्री हेमंत कुमार वैद्य (शाजापुर), श्री राकेश द्विवेदी व श्री सतीश पांडे (सीधी), सुश्री सीमा परमार व सुश्री श्वेता तिवारी (उज्जैन), श्री बिहारीलाल प्रजापति (छतरपुर), श्री अरुण कुमार भादे (छिंदवाड़ा), श्री अरुण कुमार मित्तल (इंदौर), श्री अजय कुमार मिश्रा, श्री मोहित कुमार गर्ग (सतना) और सुश्री अजिता शामिल रहे।

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