आयोजकों ने शनिवार को घोषणा की कि 12 और 13 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले आई-ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में 500 से अधिक प्रमुख संस्थागत निवेशक, पेंशन फंड और फैमिली ऑफिस शिरकत करेंगे। इस समागम में भाग लेने वाले निवेशकों के पास कुल 1,000 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की परिसंपत्ति प्रबंधन का दायरा है।
यह उच्चस्तरीय आर्थिक मंच 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि में आयोजित किया जा रहा है। इसका प्रमुख लक्ष्य ब्रिक्स के सभी 21 सदस्य एवं भागीदार देशों में ऊर्जा, अधोसंरचना और डिजिटल तकनीक से जुड़ी उन परियोजनाओं में संप्रभु संपत्तियों तथा निजी पूंजी का निवेश सुगम बनाना है, जो वित्तीय दृष्टि से पूरी तरह सक्षम हैं।
सम्मेलन की प्रासंगिकता पर बात करते हुए ‘सॉवरेन वेल्थ फंड इंस्टीट्यूट’ (एसडब्ल्यूएफआई) ने कहा कि वर्तमान वैश्विक हालात में ब्रिक्स राष्ट्र अपनी रणनीतियों को नए सिरे से ढाल रहे हैं। अमेरिकी शुल्क नीतियों के कड़े रुख, अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बदलते नियमों और डॉलर आधारित वित्तीय लेन-देन पर बढ़ते खर्चों की वजह से सदस्य देश अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं को पुनर्गठित करने में जुटे हैं।
एसडब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष और आई-ब्रिक्स के मुख्य सह-अध्यक्ष लक्ष्मी नारायणन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगाए जा रहे प्रतिबंध और अतिरिक्त शुल्क पुराने व्यापारिक व वित्तीय मार्गों को बाधित कर रहे हैं। उन्होंने बल दिया कि पूंजी प्रवाह को व्यवस्थित दिशा देने के लिए नीति-निर्माता मंत्रालयों और वैश्विक निवेश कोषों के बीच प्रत्यक्ष संवाद वक्त की मांग है, जिसे मुख्य सम्मेलन के दौरान आई-ब्रिक्स प्रभावी मंच के रूप में पूरा करेगा।
इसके अतिरिक्त, इस बैठक के एजेंडे में वित्तीय तकनीकों के आपसी जुड़ाव का विषय भी प्रमुखता से शामिल है। इसमें भारत के यूपीआई और ब्राजील के डिजिटल भुगतान नेटवर्क ‘पिक्स’ को परस्पर एकीकृत करने की दिशा में प्रगति के साथ-साथ सदस्य देशों की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं (सीबीडीसी) के अंतर-सक्रिय संचालन की व्यवहार्यता पर भी तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।