नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले में स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चलाए जा रहे संयुक्त अभियान में शनिवार को राहत दलों को पहली महत्वपूर्ण कामयाबी मिली। नेपाली सेना के साथ राहत कार्य में जुटे भारतीय सुरंग बचाव दल ने भारी मशीनरी और उपकरणों को मौके तक पहुंचाने के लिए एक सुगम अस्थायी मार्ग तैयार कर लिया है। अधिकारियों ने शनिवार को इस प्रगति की जानकारी दी।
राहत कर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर भरा पानी था, जो बचाव कार्यों की राह में गंभीर अड़चन पैदा कर रहा था। इस रुकावट को दूर करने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने शुक्रवार को गहराई तक खुदाई की, जिससे जमा हुए पानी की तेजी से निकासी सुनिश्चित की जा सकी।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इस अभियान की अद्यतन स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि भारतीय सुरंग बचाव दल ने नेपाली सेना के साथ समन्वय स्थापित करते हुए शुक्रवार को चिलिमे सुरंग में गहरी खुदाई कर जल निकासी का काम पूरा किया। राजदूत के अनुसार, घटनास्थल तक भारी मशीनें ले जाने के लिए वैकल्पिक रास्ता बनाया जा रहा है, जबकि बचाव दल के साथ आए चिकित्सकों ने स्थानीय नागरिकों की सहायता के लिए एक स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया।
गौरतलब है कि नेपाल में 26 अगस्त को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत ने इस हिमालयी देश की मदद के लिए अपने विशेष बचाव दल रवाना किए थे। इस प्राकृतिक आपदा ने देश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें 1,344 लोगों की जान चली गई, हजारों लोग लापता हो गए और कई मकान, सड़कें, पुल तथा जलविद्युत परियोजनाएं ध्वस्त हो गईं।
स्याब्रूबेसी गांव के समीप स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना स्थल 26 अगस्त की बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। वर्तमान में भारत और चीन के विशेषज्ञ दल विभिन्न पनबिजली संयंत्रों से लापता हुए कर्मचारियों और श्रमिकों को तलाशने में नेपाली सेना का सहयोग कर रहे हैं। आशंका व्यक्त की जा रही है कि इनमें से कई मजदूर अब भी सुरंगों के अंदर फंसे हुए हैं।