भारतीय वायुसेना और जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के बीच द्विपक्षीय हवाई युद्धाभ्यास ‘वीर गार्जियन 2026’ बुधवार, 9 सितंबर से राजस्थान के जोधपुर में आरंभ हो गया। आगामी 22 सितंबर तक चलने वाले इस महत्वपूर्ण सैन्य आयोजन का प्राथमिक लक्ष्य दोनों राष्ट्रों के रक्षा तंत्र के आपसी सहयोग को अधिक सुदृढ़ बनाना है।
इस युद्धाभ्यास की मुख्य विशेषता जापान के एफ-2 लड़ाकू विमानों की प्रत्यक्ष भागीदारी है। इस द्विपक्षीय प्रशिक्षण के तहत दोनों देशों के जांबाज वायु सैनिक एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और परिचालन तकनीकों को साझा करेंगे, ताकि किसी भी साझा सैन्य मिशन के दौरान उनके बीच बेहतर समन्वय और तालमेल स्थापित हो सके। उल्लेखनीय है कि यह ‘वीर गार्जियन’ श्रृंखला का दूसरा संस्करण है, जिसके लिए जापानी वायुसेना का दल पहले ही जोधपुर पहुंच चुका था।
जापानी दल के आगमन के क्रम में जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के दो सी-2 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जोधपुर स्थित एयरबेस पर उतरे थे। इसके बाद जापानी सैन्य कर्मियों ने अभ्यास की औपचारिक शुरुआत की। वायुसेना से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे अभ्यास के दौरान दोनों मित्र देश कई जटिल हवाई अभियानों और ऑपरेशनल मिशनों को मिलकर अंजाम देंगे। इस साझा मंच का मकसद आपसी समझ, युद्धक दक्षता और परिचालन तालमेल को नई दिशा देना है।
अभ्यास के अंतर्गत जोधपुर के रणनीतिक हवाई क्षेत्र में भारतीय लड़ाकू विमान जापानी एफ-2 जेट्स के साथ मिलकर विभिन्न सामरिक प्रारूपों में उड़ान भरेंगे। इस दौरान पायलटों और ग्राउंड क्रू को विविध परिस्थितियों तथा चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनों में एक साथ काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। इससे दोनों वायु सेनाओं की इंटरऑपरेबिलिटी यानी संयुक्त रूप से सटीक कार्रवाई करने की क्षमता पहले से कहीं अधिक पुख्ता होगी।
भारतीय वायुसेना और जापान के बीच आयोजित होने वाला यह अभ्यास दोनों राष्ट्रों की प्रगाढ़ होती रणनीतिक और रक्षा साझेदारी का प्रत्यक्ष उदाहरण है। ऐसे साझा सैन्य अभ्यासों के जरिए दोनों देश अपनी-अपनी उन्नत तकनीकों, रणनीतिक अनुभवों और ऑपरेशनल क्षमताओं का परस्पर आदान-प्रदान कर रहे हैं।
वायुसेना का कहना है कि यह आयोजन परिचालन कौशल को निखारने और दोनों बलों के बीच समझ को गहरा करने में अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध होगा। वहीं, रक्षा विश्लेषकों का आकलन है कि ‘वीर गार्जियन 2026’ न केवल दोनों देशों की पारंपरिक मित्रता और सामरिक साझेदारी को नई गति प्रदान करेगा, बल्कि दोनों सेनाओं के बीच आपसी विश्वास और भविष्य के सहयोग को भी व्यापक आधार देगा।