राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनज़र दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (डायल) ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और मुसाफिरों की बढ़ती संख्या को प्रबंधित करने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। इसके तहत टर्मिनल-3 के बुनियादी ढांचे और यात्री क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार किया गया है।
सम्मेलन का आयोजन दिल्ली के भारत मंडपम में तय है, जिसके चलते बड़ी तादाद में विदेशी प्रतिनिधिमंडल और विशेष उड़ानों के आगमन की उम्मीद है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, हवाईअड्डे पर ब्रिक्स प्रतिनिधियों की सुगम आवाजाही के लिए अलग से विशेष आव्रजन (इमिग्रेशन) काउंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय विमानों की लैंडिंग और उनकी पार्किंग के लिए भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
डायल ने अपनी तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि टर्मिनल-3 (टी-3) के पियर-सी को 9 सितंबर की रात से चरणबद्ध तरीके से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए चालू कर दिया जाएगा। हवाईअड्डे पर पियर दरअसल मुख्य टर्मिनल से जुड़ी वह संरचना होती है, जिसके ज़रिये यात्री एयरोब्रिज से होकर विमान तक पहुंचते हैं। विभिन्न एजेंसियों और हितधारकों के साथ तालमेल को बेहतर करने के लिए भी पुख्ता तंत्र तैयार किया गया है।
डायल के एक बयान के अनुसार, शुरुआत में पियर-सी का उपयोग अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के आगमन के लिए होगा, जबकि 10 सितंबर की शाम से यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के आगमन और प्रस्थान दोनों की नियमित शुरुआत कर दी जाएगी। इस नए पियर के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद हवाईअड्डे की अंतरराष्ट्रीय यात्री क्षमता में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, जिससे यह सालाना 3.1 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम हो जाएगा। गौरतलब है कि दिल्ली का यह हवाईअड्डा रोज़ाना 1,300 से अधिक उड़ानों का संचालन करता है।
डायल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप पाणिकर ने व्यवस्थाओं पर बात करते हुए स्पष्ट किया कि शिखर सम्मेलन के दौरान बढ़ने वाले विदेशी ट्रैफिक को सुव्यवस्थित रखने के उद्देश्य से सुरक्षा और संचालन से जुड़े सभी पक्षों के साथ मिलकर पूरी तैयारी की गई है। उन्होंने जोर दिया कि इस दौरान सुरक्षा, संरक्षा और यात्रियों की सुविधा के उत्कृष्ट मानकों को पूरी तरह कायम रखा जाएगा।