वाशिंगटन और तेहरान के मध्य गहराते सैन्य टकराव तथा समुद्री व्यापार मार्गों पर जारी हमलों के चलते गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव लगभग 2 प्रतिशत तक चढ़ गए। इस ताजा तेजी के साथ वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर गया।
कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड में 0.68 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और यह 101.90 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर पहुंच गया। इसी तरह अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी 1.81 प्रतिशत की मजबूती दर्शाते हुए 97.79 डॉलर प्रति बैरल पर दर्ज किया गया। ऊर्जा बाजार में यह उछाल मध्य पूर्व के तनावपूर्ण हालातों के सीधे असर को दर्शाता है।
तनाव की पृष्ठभूमि में ईरान का दावा है कि अमेरिका की ओर से उसके पांच तेल टैंकर डुबोए जाने के जवाब में उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के समीप 10 व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि यदि उस पर दोबारा हमले हुए, तो उसका पलटवार पहले से कहीं अधिक आक्रामक और व्यापक होगा।
इस सैन्य खींचतान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन गलियारे, होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आपूर्ति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, इस हफ्ते टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद से इस मार्ग से गुजरने वाले कच्चे तेल की मात्रा घटकर पूर्व-संघर्ष स्तर की महज एक-चौथाई रह गई है। मार्ग में आगे और रुकावटें पैदा होने के अंदेशे ने वैश्विक स्तर पर कीमतों को हवा दी है।
वैश्विक हलचल का असर घरेलू बाजार पर भी दिखा, जहां मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कच्चा तेल हल्की बढ़त के साथ लगभग 9,140 रुपये प्रति बैरल पर ट्रेड करता पाया गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निरंतर बढ़त के बाद यह अनुबंध 9,150 से 9,200 रुपये के प्रतिरोध दायरे का परीक्षण कर रहा है। यदि भाव 9,200 रुपये के स्तर से ऊपर टिकते हैं, तो यह तेजी 9,350 से 9,400 रुपये तक खिंच सकती है। नीचे की ओर 9,000-8,950 रुपये पर निकटवर्ती सहारा और 8,800-8,750 रुपये पर मजबूत सपोर्ट देखा जा रहा है। 71 के स्तर पर स्थित आरएसआई मजबूत रुझान के साथ-साथ निकट भविष्य में ठहराव या आंशिक गिरावट का संकेत भी दे रहा है।
उधर वैश्विक पटल पर डब्ल्यूटीआई क्रूड 98 डॉलर के उच्च स्तर से मामूली फिसलने के बावजूद 96 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह 98 डॉलर का स्तर पार करने में सफल रहता है, तो कीमतें 100 डॉलर की ओर अग्रसर हो सकती हैं। गिरावट की स्थिति में 95-94 डॉलर और 92-91 डॉलर इसके अहम सपोर्ट स्तर होंगे। करीब 69 के आरएसआई के साथ डब्ल्यूटीआई का ढांचा फिलहाल मजबूत बना हुआ है, हालांकि 95 डॉलर से नीचे फिसलने पर इसमें तीव्र गिरावट का जोखिम पैदा हो सकता है।