भारत-श्रीलंका रक्षा संबंधों को नई दिशा: राजनाथ सिंह की राष्ट्रपति दिसानायके से भेंट, रक्षा व ढांचागत सहयोग के अहम समझौतों पर सहमति

भारत-श्रीलंका रक्षा संबंधों को नई दिशा: राजनाथ सिंह की राष्ट्रपति दिसानायके से भेंट, रक्षा व ढांचागत सहयोग के अहम समझौतों पर सहमति

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में 9 सितंबर 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात कर रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर केंद्रित विस्तृत चर्चा की। दोनों पक्षों ने हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

बैठक में राष्ट्रपति दिसानायके ने आश्वस्त किया कि श्रीलंकाई क्षेत्र का उपयोग भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं के विरुद्ध नहीं किया जाएगा। उन्होंने भारतीय नेतृत्व के साथ पूर्व में हुए संवाद को याद करते हुए क्षेत्रीय संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था में दोनों देशों के निरंतर सहयोग को अत्यंत आवश्यक बताया।

राजनाथ सिंह ने दोनों राष्ट्रों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनस्तरीय संबंधों का उल्लेख करते हुए इसे अटूट साझेदारी बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि समुद्री पड़ोसी होने के नाते श्रीलंका की किसी भी विषम परिस्थिति में सबसे पहले सहायता पहुंचाना भारत अपना प्राथमिक कर्तव्य मानता है, और यह नीति आगे भी अटूट रहेगी।

चक्रवात ‘दितवाह’ के दौरान भारतीय अभियान ‘सागर बंधु’ के तहत मिली आपातकालीन सहायता और पुनर्निर्माण पैकेज के लिए राष्ट्रपति ने भारत के प्रति आभार व्यक्त किया। इस पर रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि यह सहयोग दोनों देशों के बीच बने सहज पारिवारिक और पड़ोसी संबंधों की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है।

बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। भारतीय रक्षा बलों द्वारा तैयार किए गए तीन बेली पुलों का वर्चुअल उद्घाटन किया गया, जिससे द्वीप राष्ट्र के आवागमन ढांचे को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा भारतीय अनुदान से श्रीलंकाई वायु सेना की छह एल-70 एयर डिफेंस गनों के उन्नयन पर औपचारिक मुहर लगी, जिससे सामरिक संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी।

द्विपक्षीय सहयोग के दायरे को बढ़ाते हुए दोनों देशों के नेशनल डिफेंस कॉलेजों के बीच अकादमिक भागीदारी पर सहमति बनी। साथ ही एनसीसी स्तर पर हुए समझौते से युवा विनिमय कार्यक्रम को विधिवत ढांचा मिला, जिससे प्रतिवर्ष कैडेटों को नई दिल्ली के आयोजनों में शामिल होने और दोनों समाजों के बीच आपसी समझ को गहरा करने का अवसर प्राप्त होगा।

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