केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज, शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के एक दिवसीय प्रवास पर पहुंच रहे हैं। अपने इस दौरे के दौरान वे सक्ती जिले के जेठा गांव में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से आयोजित विभिन्न विकास कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस अवसर पर वे प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत निर्मित मकानों के गृह प्रवेश समारोह में पात्र हितग्राहियों को उनके पक्के आशियाने की चाबियां प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्रिमंडल के सदस्य और बड़ी संख्या में त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
तय कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर 12 बजे जेठा में आयोजित मुख्य समारोह में केंद्रीय मंत्री लाभार्थियों को संबोधित करेंगे और उन्हें नए घरों का विधिवत कब्जा सौंपेंगे। गृह प्रवेश के अलावा वे पंचायत प्रतिनिधियों के प्रांतीय सम्मेलन में भी भाग लेंगे। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर ग्रामीण विकास की प्राथमिकताओं को तय करना और जनकल्याणकारी योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने पर विस्तृत विचार-विमर्श करना है।
राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के प्रदर्शन पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2014-15 से अब तक कुल 25,13,351 आवास निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। प्रशासनिक स्तर पर इनमें से 24,53,466 मकानों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जबकि 20,53,927 आवास पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं। इन निर्माण कार्यों के लिए केंद्र सरकार ने अब तक 16,853.73 करोड़ रुपये की राशि जारी की है, जबकि केंद्र और राज्य दोनों के अंशदान को मिलाकर कुल व्यय 25,504.76 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।
योजना के विस्तार के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ को 3,65,179 नए पक्के मकान तैयार करने का नया लक्ष्य आवंटित हुआ है। यह लाभ आवास+ 2024 के सर्वे में चिन्हित पात्र ग्रामीण परिवारों को दिया जाएगा। इस चरण के लिए अनुमानित बजट 4,382.15 करोड़ रुपये रखा गया है, जिससे प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में आवासहीन परिवारों को बड़ी राहत मिलने और निर्माण कार्यों में तेजी आने की संभावना है।
पंचायत सम्मेलन के दौरान स्थानीय प्रशासन, पंचायती राज व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर जनप्रतिनिधियों के साथ रणनीतिक चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ में भी शामिल होंगे, जहां वे महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों से सीधे रूबरू होंगे। इस सत्र में महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी को मजबूत करने पर विमर्श किया जाएगा।