पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को भेंट की ‘तिरुक्कुरल’, वैश्विक मंच पर भारतीय साहित्य के प्रसार की पहल

पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को भेंट की ‘तिरुक्कुरल’, वैश्विक मंच पर भारतीय साहित्य के प्रसार की पहल

नई दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तमिल साहित्य की प्रसिद्ध कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया। यह कदम भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के प्रयासों की कड़ी के रूप में सामने आया है।

प्रधानमंत्री के कार्यों से जुड़ी जानकारी साझा करने वाले मंच ‘मोदी स्टोरी’ ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि यह प्रयास महान तमिल दार्शनिक और संत तिरुवल्लुवर के कालातीत विचारों को भौगोलिक सीमाओं और भाषाई बंधनों से परे पहुंचाने की दिशा में उठाया गया कदम है। वल्लुवर के नाम से भी जाने जाने वाले संत तिरुवल्लुवर द्वारा रचित ‘तिरुक्कुरल’ में नैतिकता, राजनीति तथा प्रेम के गूढ़ सिद्धांतों का विस्तृत संकलन है।

इस घटनाक्रम के संदर्भ में साहित्य अकादमी के पूर्व सचिव के. श्रीनिवासन के बयान का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2019 के शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आधुनिक भारत की 10 प्रमुख रचनाओं का अंग्रेजी, रूसी और चीनी भाषाओं में अनुवाद कराने का प्रस्ताव रखा था, ताकि देश के क्षेत्रीय साहित्य की पहुंच अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक सुनिश्चित हो सके।

श्रीनिवासन के अनुसार, विदेश मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के समन्वय से वर्ष 2020 में 10 पुस्तकों का चयन किया गया था। बाद में कोविड-19 महामारी के समय भारत के नेतृत्व में डिजिटल माध्यम से आयोजित एससीओ बैठक में इन अनूदित पुस्तकों को औपचारिक रूप से जारी किया गया। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री ने तय लक्ष्यों की प्राप्ति पर संतोष व्यक्त किया था, जो भारतीय भाषाओं के प्रति उनकी गंभीरता को स्पष्ट करता है।

मंच ने यह भी जानकारी दी कि इससे पूर्व दिसंबर 2025 में जब राष्ट्रपति पुतिन भारत आए थे, तब प्रधानमंत्री ने उन्हें भगवद्गीता का रूसी अनुवाद उपहार स्वरूप दिया था। इस पूरे कदम को भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति के एक प्रभावी स्वरूप के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे वैश्विक मंचों पर देश की धरोहर को विशेष स्थान मिल रहा है।

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