ब्रिक्स सम्मेलन का दूसरा दिन: भारत मंडपम में सहयोग, स्थिरता और नवाचार पर मंथन, कई राष्ट्राध्यक्षों से मिले प्रधानमंत्री मोदी

ब्रिक्स सम्मेलन का दूसरा दिन: भारत मंडपम में सहयोग, स्थिरता और नवाचार पर मंथन, कई राष्ट्राध्यक्षों से मिले प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में रविवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे व अंतिम दिन की कार्यवाही शुरू हुई, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने एक खुले सत्र में हिस्सा लिया। इस बैठक के दौरान मुख्य रूप से लचीलेपन, नवाचार, आपसी साझेदारी और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विमर्श हुआ।

यह खुला सत्र भारत की अध्यक्षता में आयोजित 12 और 13 सितंबर के दो दिवसीय सम्मेलन का एक अहम हिस्सा है। इस वर्ष का मुख्य विषय “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” तय किया गया है। सम्मेलन के मंच से सदस्य राष्ट्रों को साझा प्राथमिकताओं की पहचान करने, आपसी तालमेल सुदृढ़ करने और समावेशी वैश्विक विकास की रूपरेखा को गति देने के स्पष्ट अवसर मिले हैं।

शिखर बैठक के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कूटनीतिक कार्यक्रम भी काफी व्यस्त रहा। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी सहित कजाकिस्तान, फिलीपींस, बुरुंडी, युगांडा और नाइजीरिया के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। उल्लेखनीय है कि दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति ने शनिवार को बहुपक्षवाद और समावेशी शासन पर केंद्रित सत्र में भाग लेने के साथ ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया था, जबकि मिस्र के राष्ट्रपति ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक की थी।

सम्मेलन के पहले दिन शनिवार को सभी सदस्य राष्ट्रों की आम सहमति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को स्वीकार किया गया था। इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह दस्तावेज एक ऐसे संगठन का प्रमाण है जिसका दायरा अत्यंत विस्तृत और संकल्प बेहद सुदृढ़ है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए संदेश में उन्होंने रेखांकित किया कि यह घोषणापत्र नवाचार, स्थिरता और जन-जन के संपर्क को प्राथमिकता देता है, जिससे सदस्य देशों की आकांक्षाओं को व्यावहारिक और विकासपरक दिशा मिल सके।

स्वीकृत घोषणापत्र में वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों पर भी कड़ा रुख अपनाया गया है। समूह ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। इसके साथ ही, इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई, फिलिस्तीन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन की आवश्यकता बताई गई और गाजा में मानवीय राहत पहुंचाने के कानूनी दायित्वों का स्मरण कराया गया।

आर्थिक मोर्चे पर, ब्रिक्स देशों ने एकतरफा लगाए जाने वाले वित्तीय प्रतिबंधों को तुरंत समाप्त करने की मांग उठाई। घोषणापत्र में साफ कहा गया कि मनमाने टैरिफ और पर्यावरण के नाम पर लगाए जा रहे व्यापारिक प्रतिबंध विकासशील राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था को बाधित कर रहे हैं। गौरतलब है कि 1 जनवरी 2026 से प्रभावी भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता मुख्य रूप से मानव-केंद्रित दृष्टिकोण और संस्थागत मजबूती पर केंद्रित रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *