संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के आपात सत्र में मंगलवार को राजनयिकों ने यमन के हूती विद्रोहियों के लाल सागर के रणनीतिक हिस्सों की ओर तेजी से बढ़ने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। बैठक के दौरान यह चेतावनी दी गई कि हूती लड़ाकों की इस सैन्य बढ़त से स्वेज नहर तक जाने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में व्यवधान आ सकता है, जिससे समूचे वैश्विक व्यापार तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का जोखिम पैदा हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव खालिद खियारी ने आपातकालीन चर्चा को संबोधित करते हुए बताया कि यमन के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में सशस्त्र संघर्ष तेज हो गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि विद्रोही बल बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और उन्होंने दक्षिणी लाल सागर के कई द्वीपों पर अपना नियंत्रण भी स्थापित कर लिया है। खियारी के अनुसार, बाब अल-मंदब और उसके समीपवर्ती जलक्षेत्र में स्थिरता तेजी से कम हुई है, जबकि यह गलियारा स्वेज नहर के जरिए वैश्विक जहाजरानी के संचालन के लिए बेहद अनिवार्य है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के आंकड़ों को रेखांकित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यमन का आंतरिक संघर्ष अंतरराष्ट्रीय नौपरिवहन के लिए और अधिक घातक न बने, इसे हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। ज्ञात हो कि दुनिया भर के कुल कंटेनर ट्रैफिक का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा और समूचे वैश्विक व्यापार का तकरीबन 12 फीसदी प्रवाह इसी स्वेज नहर के रास्ते होता है।
परिषद की परिचर्चा में सदस्य देशों ने आशंका व्यक्त की कि यदि बाब अल-मंदब में समुद्री आवागमन बाधित हुआ, तो दुनिया को दो प्रमुख जलमार्गों पर एक साथ संकट का सामना करना पड़ेगा। पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन काफी घट चुका है, जो विश्व की करीब 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति की जीवनरेखा है। ग्रीस के स्थायी प्रतिनिधि ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज के पहले से तनावग्रस्त होने की स्थिति में लाल सागर के प्रवेश बिंदु पर अस्थिरता वैश्विक आर्थिक तंत्र और समुद्री सुरक्षा के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।
राजनयिक स्तर पर सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि अब्दुलअजीज एम. अलवासिल ने आरोप लगाया कि हूती विद्रोही वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से इस जलमार्ग को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधि जेनिफर लोसेटा ने तेहरान पर हूतियों को सैन्य सहायता और दिशा-निर्देश देने का आरोप लगाते हुए सुरक्षा परिषद से ईरान के खिलाफ कदम उठाने का आग्रह किया। बहरीन के स्थायी प्रतिनिधि जमाल फारेस अलरुवेईई ने भी परिषद की चेतावनियों की अनदेखी करने के लिए हूतियों की निंदा की और अधिक सख्त कार्रवाई की मांग की।
यमन के स्थायी प्रतिनिधि अब्दुल्ला अली फदेल अल-सादी ने परिषद को अवगत कराया कि उनकी सरकार पश्चिमी तट पर विद्रोहियों की प्रगति रोकने के लिए संघर्षरत है। उन्होंने कहा कि जहाजरानी प्रभावित होने से यह मसला अब अंतरराष्ट्रीय हो चुका है, इसलिए हूतियों पर लागू हथियार प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन कराया जाए। हालांकि, सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के बीच जारी मतभेदों के चलते किसी साझा और निर्णायक कदम पर सहमति बन पाना अब भी कठिन बना हुआ है।