भारत सरकार ने मंगलवार को बोत्सवाना में एड्स के उपचार में सहयोग देने के लिए 10 टन एंटीरेट्रोवायरल औषधियों की एक बड़ी खेप भेजी है। इस कदम की घोषणा करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के सदस्य देशों के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा के मोर्चे पर ठोस साझेदारी निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए विदेश मंत्री ने बताया कि यह औषधीय सहायता बोत्सवाना के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को एड्स और एचआईवी के खिलाफ लड़ाई में सहयोग देने के लिए उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने दोहराया कि यह पहल विकासशील विश्व के साझीदारों के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में निरंतर सहयोग बढ़ाने की भारत की नीति का सीधा प्रमाण है।
गैबोरोन में स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस संदर्भ में उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से घनिष्ठ और दोस्ताना संपर्क रहा है, जिसे पिछले कुछ वर्षों में बढ़े परस्पर विश्वास से नई दिशा मिली है। इसी सकारात्मक पृष्ठभूमि में बीते नवंबर माह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बोत्सवाना का दौरा किया था। यह भारत के किसी भी राष्ट्राध्यक्ष का वहां का पहला ऐतिहासिक राजकीय दौरा था।
पारस्परिक संबंधों के इसी विस्तार के तहत वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने हाथ मिलाया। बोत्सवाना ने भारत के ‘प्रोजेक्ट चीता’ को गति देते हुए आठ चीते भेंट करने का निर्णय लिया। मोकोलोडी नेचर रिजर्व के संयुक्त दौरे के समय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उनके समकक्ष डुमा गिदोन बोको की उपस्थिति में यह प्रतीकात्मक प्रक्रिया पूरी की गई। दोनों नेताओं ने घांजी इलाके से लाए गए चीतों को निर्धारित पृथक-वास (क्वारंटीन) में रखे जाने के कार्य का जायजा लिया। इस कदम को राष्ट्रपति सचिवालय ने पर्यावरण संरक्षण में सहयोग का एक नया अध्याय करार दिया।
राष्ट्रपति बोको ने भारतीय राष्ट्रपति के सम्मान में दिए वक्तव्य में भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ का दर्जा देते हुए कहा कि भारत की विकास यात्रा बोत्सवाना के लिए सदैव एक बड़ा संबल और प्रेरणा रही है। उन्होंने शिक्षा के विस्तार, लैंगिक बराबरी और वंचित समूहों के सामाजिक उत्थान के लिए राष्ट्रपति मुर्मु के योगदान को सराहा।
बोत्सवाना के राष्ट्रपति ने आगे कहा कि पिछले वर्ष सत्ता संभालने के बाद उनके देश की धरती पर यह किसी विदेशी नेता का पहला राजकीय आगमन था, जो इस बात को सिद्ध करता है कि वे भारत के साथ संबंधों को कितना महत्व देते हैं। विस्तृत विचार-विमर्श और औपचारिक उच्चस्तरीय बैठकों में दोनों देशों के बीच डिजिटल तकनीक, रक्षा, व्यापार, निवेश, कौशल विकास, कृषि, शिक्षा, हरित ऊर्जा और स्वास्थ्य के दायरे में संयुक्त सहयोग को नई गति देने पर पूर्ण सहमति बनी।