ब्रिक्स सम्मेलन के बाद विदेशी नेताओं के अस्वस्थ होने की खबरें बेबुनियाद, विदेश मंत्रालय ने दी सतर्क रहने की सलाह

ब्रिक्स सम्मेलन के बाद विदेशी नेताओं के अस्वस्थ होने की खबरें बेबुनियाद, विदेश मंत्रालय ने दी सतर्क रहने की सलाह

भारत में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के अस्वस्थ होने संबंधी सोशल मीडिया दावों को विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक इकाई ने गुरुवार को पूरी तरह भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण करार दिया। मंत्रालय ने आम नागरिकों को ऐसे निराधार अभियानों के प्रति सचेत रहने का परामर्श जारी किया है।

विदेश मंत्रालय (एमईए) के फैक्ट चेक प्रभाग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर आधिकारिक संदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि इंटरनेट पर प्रसारित की जा रहीं ऐसी पोस्टें गुमराह करने वाली हैं। मंत्रालय ने जनता को इस तरह के दुर्भावनापूर्ण प्रचार से सावधान रहने की हिदायत दी। इसके साथ ही, भ्रम फैलाने वाले कई विशिष्ट सोशल मीडिया खातों और उनके दावों को भी सार्वजनिक रूप से चिह्नित किया गया।

जांच के दौरान फैक्ट चेक टीम ने ‘फर्स्ट स्क्वाक’ नामक हैंडल की एक पोस्ट को रेखांकित किया, जिसमें बीबीसी के हवाले से यह दावा किया गया था कि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भारत में ब्रिक्स बैठक के बाद बीमार पड़ गए हैं, जबकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संदर्भ में रिपोर्ट अपुष्ट बताई गई थी। इसी प्रकार, ‘अनयूजुअल व्हेल्स’ द्वारा प्रसारित उस सूचना को भी तथ्यहीन पाया गया, जिसमें रामाफोसा और कथित रूप से शी जिनपिंग के अस्वस्थ होने की अपुष्ट बात कही गई थी।

भ्रामक सामग्री के विश्लेषण में ‘रॉ एग नेशनलिस्ट’ नामक अकाउंट की वह पोस्ट भी सामने आई, जिसमें एक वीडियो साझा कर यह आरोप लगाया गया था कि सम्मेलन में तैयार भोजन के कारण शी जिनपिंग और सिरिल रामाफोसा अस्वस्थ हुए। इसके अलावा ‘डक्का-डक्का’ नामक यूजर द्वारा दोनों नेताओं को आयोजन के दौरान फूड पॉइजनिंग होने की कही गई बात को भी विदेश मंत्रालय ने पूर्णतः निराधार बताया।

मंत्रालय ने ‘ब्रिक्स न्यूज’ और ‘इमैनुएल किमुताई मोटेलिन’ के उन दावों का भी खंडन किया, जिनमें विभिन्न नेताओं के बीमार होने की अफवाहें फैलाई गई थीं। साथ ही, ‘मैव्रिक’ नाम के एक अन्य खाते द्वारा भारत यात्रा से लौटे नेताओं की सेहत पर की गई व्यंग्यात्मक टिप्पणियों को भी भ्रामक सूचना तंत्र का हिस्सा मानते हुए विदेश मंत्रालय ने खारिज किया।

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