नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले ने शुक्रवार को नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य केंद्र रसुवा जिले में आई अचानक बाढ़ के बाद भारत द्वारा दी गई आपातकालीन मानवीय और बचाव सहायता रही, जिसके लिए नेपाली वित्त मंत्री ने भारत सरकार के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया।
नेपाली दूतावास के अनुसार, दोनों शीर्ष मंत्रियों ने संकट के समय आपसी सहयोग की सराहना करते हुए भारत-नेपाल के पारंपरिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में बुनियादी कनेक्टिविटी, द्विपक्षीय निवेश और ऊर्जा विकास के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग को और अधिक गहरा करने की रणनीतियों पर विशेष रूप से बातचीत हुई।
इस बीच, भारत सरकार नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से निपटने के लिए निरंतर सामग्री और तकनीकी सहायता भेज रही है। नेपाल स्थित भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के अनुसार, भारतीय वायुसेना का आठवां विमान हाल ही में राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचा था, जिसे वहां के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महावीर पुन को आधिकारिक तौर पर सौंपा गया।
विदेश मंत्रालय के विवरण के अनुसार, 26 अगस्त से प्रभावी इस राहत मिशन में अब तक आठ विशेष उड़ानों के जरिए 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा चुकी है। बचाव, फोरेंसिक जांच और खोज अभियानों को गति देने के उद्देश्य से भारत ने अपने 54 प्रशिक्षित तकनीकी विशेषज्ञों को भी नेपाली प्रशासन की सहायता के लिए भेजा है।
भारत द्वारा उपलब्ध कराई गई सहायता में बुनियादी आवश्यकताओं से लेकर जटिल तकनीकी संसाधन शामिल हैं। जहां एक ओर दवाओं, सौर लाइटों, तंबुओं, स्वच्छता किटों और कंबलों जैसी मानक वस्तुओं का वितरण किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरंग और दलदल में बचाव के लिए गैस डिटेक्टर, ब्रीदिंग उपकरण, इन्फ्लेटेबल वॉकवे, मड रेस्क्यू सूट, ड्रेनेज पंप और डीएनए प्रोफाइलिंग किट जैसे संवेदनशील उपकरण भी दिए गए हैं।
वर्तमान में भारतीय सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम नेपाली सैन्य बलों के साथ पूर्ण समन्वय बनाकर जमीनी स्तर पर राहत कार्य कर रही है। यह संयुक्त अभियान विशेष रूप से लांगटांग और चिलिमे के अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रित होकर चलाया जा रहा है।